शासनादेशों को नहीं मानता राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज

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शासनादेशों को नहीं मानता राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज
अबतक मेडिकल कालेज में नहीं की गई पोस्टमार्टम की व्यवस्था
सीएमओ से हुए एमओयू की शर्तों को भी ठेंगा दिखा रहा मेडिकल कालेज
फारेंसिक डाक्टर की नहीं लगाई जाती पोस्टमार्टम ड्यूटी

अयोध्या। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में पोस्टमार्टम (शव परीक्षण) करने की अनुमति दी है। यह फैसला फॉरेंसिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, जिला अस्पतालों का बोझ कम करने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लिया गया है। अपर मुख्य सचिव की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि निजी कॉलेज केवल लावारिस शवों का पोस्टमार्टम कर सकेंगे। मान्यता प्राप्त निजी मेडिकल कॉलेज अब फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग की देखरेख में पोस्टमार्टम कर सकेंगे।
अधिनियम-1956 के तहत निजी मेडिकल कालेज केवल लावारिस या चिन्हित शवों का ही परीक्षण करेंगे। जघन्य अपराधों या मेडिकल बोर्ड द्वारा आवश्यक पोस्टमार्टम निजी कॉलेजों में नहीं होंगे। इस कदम से मेडिकल छात्रों को फॉरेंसिक जांच की व्यावहारिक शिक्षा बेहतर तरीके से मिलेगी। यह निर्णय शवों के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को होने वाली देरी को कम करने और फॉरेंसिक जांच को अधिक व्यवस्थित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
प्रदेश के सभी मेडिकल कालेजों में पोस्टमार्टम की सुविधा मुहैया कराने के सम्बन्ध में अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन अमित कुमार घोष ने 12 फरवरी को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण उत्तर प्रदेश लखनऊ को पत्र भेजकर सभी मेडिकल कालेजों में पोस्टमार्टम कराने की सुविधा प्रारम्भ कराने के निर्देश दिए थे। राजर्षि दशरथ स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय अयोध्या में गृह विभाग, अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन व महानिदेशालय के निर्दोशो पर कोई अमल नहीं हो रहा है। यहां शासन के निर्देशों को आखिर क्यों नहीं धरातल पर उतारा जा रहा है, इसके पीछे लम्बी कहानी है। वैसे तो मेडिकल कालेज अयोध्या के प्राचार्य डा दिनेश सिंह मार्तोलिया शासन के निर्देशों का पालन न करने के पीछे अपना एक तर्क देते हैं,कि हमारे कालेज के छात्रों को शव विच्छेदन का प्रशिक्षण देने के लिए जिला अस्पताल के मर्चरी से एमओयू किया गया है। लेकिन नई व्यवस्था को लागू न कर जो व्यवस्था बताई जा रही है वास्तव में वह शासनादेश के पहले की है।
राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की मान्यता में पोस्टमार्टम की सुविधा न होना आड़े आ रही थी। इसका हल जिला अस्पताल की मर्चरी से एमओयू साइन कर किया गया। मिली जानकारी के अनुसार फारेंसिक डिपार्टमेंट की विभागाध्यक्ष डा अंजू सिंह ने 14 जनवरी 2026 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी अयोध्या को पत्र भेजकर सरकारी मर्चरी में एमबीबीएस के छात्रों को प्रशिक्षण देने के लिए अनुमति मांगी थी। इसके बाद मेडिकल कालेज के प्राचार्य ने भी दो फरवरी 2026 को सीएमओ को पत्र भेजा था। सीएमओ ने दो फरवरी 2026 को एमबीबीएस के छात्रों को प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए सशर्त अनुमति दे दी।
सीएमओ ने प्रशिक्षण के लिए ये शर्तें रखी
-पोस्टमार्टम हाउस (चीर घर) अयोध्या के अन्तर्गत होने वाले लावारिस एवं अज्ञात शवों, आपदाओं व सड़क दुर्घटनाओं के शव विच्छेदन प्रकिया मेडिकोलीग पोस्टमार्टम प्रकिया में फारेंसिक एक्सपर्ट म्मिलित रहकर ड्यूटी देंगें और द्वितीय ओपिनियन में विशेषज्ञ परामर्श भी देंगें।
पोस्टमार्ट हाउस अयोध्या में सम्पादित किये जाने वाले पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी सम्बन्धित नियमित नियुक्ति के फारेन्सिक चिकित्सा शिक्षक व सीएमओ के अधीन चिकित्सा अधिकारी उनके द्वारा यह कार्य यू०पी० मेडिकल मैनुअल में प्रतिपादित अन्य मार्गदर्शक सिद्धान्त/प्रक्रिया एवं सुसंगत अनुसार कराया जायेगा।
इस व्यवस्था के अन्तर्गत पोस्टमार्टम प्रक्रिया कराये जाने की दशा में मेडिकल कॉलेज में फॉरेन्सिक विभाग के छात्र पोस्टमार्टम के दौरान उपस्थित रह सकते है। कराये जाने वाले पोस्टमार्टम के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि न्यायालयों / आयोगों / एन०एम०आर०सी० / शासन द्वारा समय-समय पर निर्गत दिशा-निर्देशों के अन्तर्गत समस्त प्रकिया की जायेगी। सभी लावारिस / अज्ञात शवों के पोस्टमार्टम प्रक्रिया में नियमित नियुक्त फॉरेन्सिक शिक्षक की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी, जिससे वर्तमान में पोस्टमार्टम में नियुक्त चिकित्सा अधिकारी पर अधिभार कम हो सके एवं फॉरेन्सिक एक्सपर्ट की उपस्थिति में होने से मेडिकोलीगल में न्यायिक विचलन की स्थिति उत्पन्न न हो। यह भी कहा गया कि समस्त फॉरेन्सिक शिक्षक उ०प्र० में एन०आई०सी० द्वारा विकसित किये गये साफ्टवेयर पर अपनी आई०डी० बनवायेंगें व पंजीकृत होंगें।
एमओयू तो हुआ लेकिन नहीं हो रहा सीएमओ की शर्तों का पालन
राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज में शासन की गाइड लाइन का तो पालन अब तक नहीं हुआ है, कारण प्राचार्य डा दिनेश सिंह मार्तोलिया बताते हैं कि अभी पोस्टमार्टम हाउस नहीं बना है। और जिले के पोस्टमार्टम हाउस को लेकर सीएमओ के साथ हुए एमओयू का पालन क्यों नहीं हो रहा है? इसका कोई जवाब नहीं दिया। सीएमओ की शर्तों को न मानने के पीछे की कहानी यह है कि डा अंजू सिंह प्रारंभिक विभागाध्यक्ष हैं। जो डा डीके सिंह की पत्नी हैं। वे पोस्टमार्टम हाउस में ड्यूटी नहीं करना चाहती हैं। यदि वे पोस्टमार्टम हाउस में ड्यूटी करें तो विसरा रिपोर्ट बनाने की सुविधा जिले में हो जाएगी, जिससे लोगों को शीघ्र न्याय मिलेगा। सीएमओ ने पत्र भेजकर फारेंसिक एक्सपर्ट को पोस्टमार्टम ड्यूटी में भेजने के लिए कहा लेकिन सीएमओ के अनुरोध को मेडिकल कालेज प्रशासन नजरंदाज कर रहा है।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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