सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ में रामकथा की गूंज, अयोध्या की महिमा पर सदगुरु भगवान का विशेष प्रवचन
अयोध्या।
अयोध्या धाम में चल रहे सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ के पांचवें दिन दौरान बुधवार को आयोजित प्रवचन सत्र में सदगुरु भगवान ने श्रीराम के अनंत स्वरूप और अयोध्या की आध्यात्मिक महत्ता पर विस्तृत प्रकाश डाला। यज्ञ मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार और रामनाम संकीर्तन के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रवचन के दौरान रामचरितमानस की चौपाइयाँ— “नाना भाँति राम अवतारा। रामायण सत कोटि अपारा॥ कल्पभेद हरिचरित सुहाए। भाँति अनेक मुनीसन्ह गाए॥”
का उल्लेख करते हुए सदगुरु भगवान ने कहा कि भगवान श्रीराम के अवतार अनेक प्रकार के हैं और उनकी कथा अनंत रूपों में वर्णित की गई है। उन्होंने बताया कि विभिन्न कल्पों और युगों में ऋषि-मुनियों ने अपने-अपने भाव के अनुसार रामकथा का गायन किया है, जिससे रामायण की महिमा और व्यापकता सिद्ध होती है। सदगुरु भगवान ने कहा कि श्रीराम केवल एक ऐतिहासिक चरित्र नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। उनकी लीलाएँ और चरित्र समय के साथ नई-नई व्याख्याओं के माध्यम से समाज को दिशा देते रहे हैं। इस अवसर पर अयोध्या के नाम के अर्थ पर भी विशेष चर्चा करते हुए सदगुरु भगवान ने बताया कि ‘अयोध्या’ का शाब्दिक अर्थ है—जिसे कभी युद्ध में जीता न जा सके। यह केवल भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि धर्म की अजेयता और सत्य की विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अयोध्या वह पावन भूमि है जहाँ से मर्यादा, आदर्श शासन और सनातन मूल्यों का संदेश संपूर्ण विश्व में प्रसारित हुआ।
प्रवचन के उपरांत श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति अर्पित कर विश्व शांति और समाज कल्याण की कामना की। आयोजन समिति के अनुसार, महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन आध्यात्मिक प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं, जिनमें दूर-दराज से श्रद्धालु सम्मिलित हो रहे हैं। सप्तम अश्वमेघ महायज्ञ के अंतर्गत हो रहे ऐसे कार्यक्रमों से अयोध्या धाम का वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना हुआ है इस अश्वमेघ महायज्ञ में देश विदेश से लाखों लोग इस महायज्ञ में चल रहे प्रवचन का रसपान किया
Author: Rainbow News Hindustan
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