बार सिर्फ चुनाव नहीं, संघर्ष का मंच है
बार चुनाव में उतरे योगेन्द्र पाण्डेय, सिस्टम बदलने का ऐलान
महामंत्री प्रत्याशी योगेन्द्र पाण्डेय से सीधी, बेबाक बातचीत
अयोध्या।बार एसोसिएशन फैजाबाद–अयोध्या का चुनाव इस बार सिर्फ पदों की लड़ाई नहीं, बल्कि वरिष्ठ बनाम जूनियर, सुविधा बनाम उपेक्षा और वादे बनाम हकीकत की जंग बनता जा रहा है। इन्हीं सवालों के बीच महामंत्री पद के प्रत्याशी योगेन्द्र पाण्डेय अधिवक्ता खुलकर सामने आए हैं। 2011 में उपाध्यक्ष रह चुके योगेन्द्र पाण्डेय का दावा है—मैं भाषण नहीं, व्यवस्था बदलने आया हूं। समाचार संवाददाता ने उनसे सीधे सवाल किए, जवाब भी उतने ही साफ और बेबाक आए।
सवाल: आप महामंत्री पद का चुनाव क्यों लड़ रहे हैं?
*जवाब (योगेन्द्र पाण्डेय)*
मैं 2011 में बार एसोसिएशन का उपाध्यक्ष रह चुका हूं। बार की कार्यप्रणाली को बहुत करीब से देखा है। मेरा मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ और जूनियर अधिवक्ताओं की वास्तविक समस्याओं को बार के मंच से मजबूती से उठाना और उनका समाधान कराना है। यह चुनाव मेरे लिए पद नहीं, जिम्मेदारी है।
सवाल: अधिवक्ताओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर आपकी क्या सोच है?
जवाब:* आज सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अधिवक्ता को जो धनराशि मृत्यु के बाद मिलती है, वह जीवनकाल में नहीं मिल पाती। मेरी प्राथमिकता है कि यह धनराशि अधिवक्ताओं को उनके जीवनकाल में मिले, ताकि वे उसका सही उपयोग कर सकें। इसके लिए बार स्तर से ठोस प्रस्ताव रखा जाएगा।
*सवाल: न्यायपालिका से जुड़ी समस्याओं को लेकर आपका क्या रोडमैप है?
*जवाब:* न्यायपालिका से जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याएं हैं—चाहे कार्य प्रणाली हो या अधिवक्ताओं की सुविधाएं। हम न्यायमूर्ति महोदयों से सामूहिक रूप से मिलकर इन मुद्दों को रखेंगे, ताकि समाधान संवाद के जरिए निकले, टकराव से नहीं।
सवाल: वादकारियों (मुवक्किलों) को लेकर अधिवक्ताओं को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
*जवाब:* वादकारियों को लेकर अक्सर अनावश्यक विवाद और दबाव की स्थिति बनती है। अगर मैं निर्वाचित होता हूं तो इस समस्या के निराकरण के लिए एक स्पष्ट और व्यवहारिक व्यवस्था बनाने का प्रयास करूंगा, जिससे अधिवक्ता सम्मान के साथ अपना कार्य कर सके।
सवाल: बार एसोसिएशन परिसर की गंदगी को लेकर आपकी क्या योजना है?
*जवाब:* बार परिसर की गंदगी एक गंभीर समस्या है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मैं नगर निगम और महापौर जी से सीधे वार्ता कर सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराने का प्रयास करूंगा। अधिवक्ता परिसर साफ होगा, तभी गरिमा बनी रहेगी।
*सवाल: महिला अधिवक्ताओं की समस्याओं पर आपका क्या स्टैंड है?
*जवाब:* महिला अधिवक्ताओं की सबसे बड़ी समस्या बैठने की है। उनके लिए न तो पर्याप्त जगह है और न ही सुरक्षित व्यवस्था। मैं महिला अधिवक्ताओं के लिए कॉमन रूम का निर्माण कराऊंगा, ताकि उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
सवाल: अगर एक लाइन में कहना हो, तो आपकी चुनावी पहचान क्या होगी?
*जवाब:* वादों की नहीं, काम की राजनीति। मैं बार को सिर्फ संस्था नहीं, अधिवक्ताओं की ताकत बनाना चाहता हूं।
बड़ा सवाल यह है कि क्या बार एसोसिएशन को इस बार एक ऐसा महामंत्री मिलेगा जो सिर्फ चुनाव न जीते, बल्कि व्यवस्था भी बदले—फैसला अब अधिवक्ताओं के हाथ में है।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





