गवरी विसर्जन में उमड़ा लोगो का हुजूम।
घाणेराव,पाली
कस्बे के गुड़ा भोपसिंह क्षेत्र के भील समाज का पिछले एक माह से चलने वाला लोक संस्कृति व लोक नृत्य
गवरी नृत्य कार्यक्रम का आज विधिवत रूप से सम्पन्न हो गया। केन तालाब क्षेत्र में स्थित पुराने भीलवाड़ा में माताजी मंदिर से गवरी माता की प्रतिमा सहित गवरी के उपयोग में आने वाले सज सामन को लेकर भील समाज का पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मंगल ध्वनि के साथ गवरी विसर्जन के लिए रायड़ा तालाब में जाने के लिए शोभायात्रा शुरू हुई।शोभा यात्रा में भील समाज के लोग गवरी माता जिनप्रतिमा व सज समान व महिलाएं अपनी पारंपरिक वेशभुषा में सर पर पाती यानि अंकुरित जो उठाकर माता जैकारे लगाते हुए व मंगल गीत गति ही चल रही थी।
शोभायात्रा रायड़ा तालाब में पहुंचने पर भील समाज के लोग गवरी माता की विधि विधान से पूजा आचरण कर वाद्ययंत्रों मादल व ढोल की मंगल ध्वनि के साथ तालाब में विसर्जन कर दिया। इसके पश्चात गवरी की टोली के युवाओं ने दौड़ लगाकर पुनः माता के मंदिर पहुंच कर नारियल उठाने की परंपरा निभाई,इसी के साथ पिछले एक माह से चल रहे इस गवरी नृत्य का आज समापन हो गया।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत घाणेराव के प्रशासक चंद्रशेखर मेवाड़ा,देसूरी ग्राम पंचायत के प्रशासक केसाराम भील सहित भारी संख्या में छत्तीस कोम के लोगों ने इस लोक संस्कृति गवरी विसर्जन में अपनी भागीदारी निभाई।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





