ऋषियों की तपोभूमि रहा है घाणेराव का गुप्तेश्वर महादेव का गुफा मंदिर।
महर्षि जावाली, ऋषि जमदाग्नि व परशुराम की तपो भूमी रहा गुप्तेश्वर महादेव।
गुप्तेश्वर महादेव का दो दिवसीय मेला गुरुवार से शुरू।
घाणेराव,पाली।
घाणेराव के दक्षिण दिशा की छोर पर पहाड़ी की गुफा को कई ऋषियों ने अपनी तपो स्थली बनाया।
वैदिक काल ऋग्वेद के अनुसार महर्षि जावाली ने सघन हरियाली वृक्षो से आच्छादित इस भूमी को अपनी तपो भूमी बनाया। परशुराम के पिता वेद व्याख्याता जमदाग्नि ऋषि ने भी इसी क्षेत्र में तपस्या की। इनके बाद परशुराम ने अरावली की वादियों में जाने से पूर्व इसी स्थल को अपनी तपोभुमी बनाया था।
कस्बे की प्राचीन भग्न चार दिवारी के दक्षिण दिशा में मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ी की गुफा में रव्वेदार स्वयं भू शिवलिंग की स्थापना की जो आज भी गुप्तेश्वर महादेव से व्याख्यात है। प्राकृतिक छटा से आवृत अनेकानेक विशाल प्रस्तर के सोम्य व अद्भुत शिवलिंग के रूप में मंडित डूंगरी आज भी प्रकृति की अनुपम भव्यता के अतीत की स्मृति संजोये हुए है। इन प्रस्तरों के बीच 5 से 12 फिट के पाषाण पिंडो के मध्य 60 फिट की चढ़ाई के बाद गुफा में एक प्रकृति निर्मित रव्वेदार प्रस्तरोंभूत प्राम्भिक काल का नैसर्गिक स्वयं भू शिवलिंग अवस्थित है। जिसका इस क्षेत्र में एक अल्मय ज्योर्तिलिंग के रूप में आविर्भाव हुआ। इसके पश्यात यहां से पहाड़ी रास्ते से 9 किलोमीटर की दूरी पर अरावली की दुर्गम वादियों को परशुराम ने अपने फरसे के आघात से पहाड़ चीर कर इसी प्रकार के रव्वेदार प्राकृतिक शिवलिंग की स्थापना कर सघन आराधना व तपस्या की जो आज विश्व प्रशिद्ध परशुराम महादेव के नाम से व्याख्यात है। परशुराम ने अपने आराधना काल के दौरान इस गुप्तेश्वर महादेव की गुफा में स्वयं भू शिवलिंग की तपस्या में अपने आप को लीन कर दिया था। जिसका नाम कालांतर में ही गुप्तेश्वर महादेव के रूप मान्यता है।
इस पहाड़ी की चोटी पर राठौड़ गोत्र की कुलदेवी नागणेश्वरी माता का मंदिर है जो लोगो के आस्था केंद्र बना हुआ है। 1975 ने शिव कला आर्ट मन्दिर से शिव नवयुवक मंडल की स्थापना हुई तब से आज तक यहां प्रतिवर्ष चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी व चतुर्थदर्शी को दो दिवसीय भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। जो आज से शुरू होगा। साथ सम्पूर्ण श्रावण मास व महाशिवरात्रि को विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होने से यहां मेले जैसा माहौल रहता है।शिव नवयुवक मण्डल ने 1 अप्रेल 1996 को इस पहाड़ी के चारो और मन्दिर बनाकर द्वादश ज्योर्तिलिंग की स्थापना करने से इस स्थान का महत्व और भी बढ़ गया। यहां पर दर्शनार्थियों के लिये धर्मशाला,रसोई घर सहित पेयजल की समुचित व्यवस्था दानदाताओ द्वारा की गई।
Author: Rainbow News Hindustan
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