वासुदेव घाट के कोठा मंदिर में भव्य झूलन उत्सव और भजन संध्या, चांदी व फूलों से सजे झूलों पर विराजे भगवान
अयोध्या। वासुदेव घाट रामनगरी की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करते हुए वासुदेव घाट स्थित कोठा मंदिर में इन दिनों भव्य झूलन उत्सव एवं भजन संध्या का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया जा रहा है। उत्सव के दौरान मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। भगवान को चांदी तथा रंग-बिरंगे फूलों से सुसज्जित सुंदर झूलों पर विराजमान कराया गया है। झूले पर विराजे भगवान के मनोहारी स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।
झूलन उत्सव के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। श्रद्धालु भगवान के झूला दर्शन कर भाव-विभोर हो रहे हैं और उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। भजन संध्या में भक्ति गीतों और मधुर भजनों की गूंज से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा है। देर शाम तक श्रद्धालु भक्ति संगीत में रमकर भगवान की आराधना करते नजर आ रहे हैं।
आयोजक अमन त्रिपाठी द्वारा उत्सव में आने वाले सभी संत-महंतों, श्रद्धालुओं एवं भक्तों का आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया जा रहा है। आयोजन में पहुंचने वाले प्रत्येक श्रद्धालु का सम्मानपूर्वक अभिनंदन कर उन्हें झूलन उत्सव में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। आयोजन की व्यवस्था में मंदिर से जुड़े सेवाभावी लोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका दिखाई दे रही है।
अयोध्या की रसिक परंपरा में झूलन उत्सव का विशेष महत्व माना जाता है। सावन के इस पावन अवसर पर रामनगरी के विभिन्न मंदिरों और रसिक पीठों में भगवान के झूला विहार के साथ भजन, कजरी और विशेष समाज गायन की परंपरा निभाई जाती है। लक्ष्मण किला सहित अयोध्या के प्रमुख मंदिरों में भी झूलन उत्सव के दौरान पारंपरिक गायन और भक्ति संगीत की धूम रहती है।
कजरी के मधुर सुर, भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति और समाज गायन की पारंपरिक शैली श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद प्रदान करती है। झूलन उत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि अयोध्या की समृद्ध सांस्कृतिक एवं रसिक परंपरा का जीवंत स्वरूप भी है।
सावन मास में अयोध्या के मंदिरों में भगवान के झूलन विहार की विशेष परंपरा रही है। फूलों से सजे झूले, दीपों की रोशनी, भजन-कीर्तन और संत-महंतों की उपस्थिति से रामनगरी का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। वासुदेव घाट स्थित कोठा मंदिर में आयोजित यह उत्सव भी इसी प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
आयोजक अमन त्रिपाठी ने कहा कि झूलन उत्सव का उद्देश्य भगवान की भक्ति के साथ अयोध्या की सनातन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाना है। उत्सव में अधिक से अधिक श्रद्धालुओं की सहभागिता से आयोजन की भव्यता और बढ़ रही है।
कोठा मंदिर में चल रहे झूलन उत्सव के दौरान प्रतिदिन भक्तों की भीड़ उमड़ रही है और पूरा परिसर “राधे-राधे”, “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज रहा है। श्रद्धालु भगवान के मनोहारी झूला दर्शन के साथ भजन संध्या का आनंद लेकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





