चित्तोडगढ से नरेन्द्र सेठिया की रिपोर्ट
राजवी-आक्या एक हुए तो जाडावत-सिसोदिया ने भी मिलाया मंच,
चित्तौड़गढ़। चुनावी राजनीति में समीकरण कब करवट बदल लें, कहा नहीं जा सकता। नगर निकाय और पंचायतीराज चुनाव की आहट के साथ चित्तौड़गढ़ की सियासत में भी नए राजनीतिक समीकरण उभरते दिखाई दे रहे हैं। पिछले दो दिनों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सामने आए राजनीतिक घटनाक्रम ने शहर से लेकर जिले तक सियासी चर्चाओं को तेज कर दिया है।
राजवी-आक्या की जुगलबंदी ने चौंकाया
एक दिन पहले भाजपा के पूर्व विधायक प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी और स्थानीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या एक ही मंच पर नजर आए। दोनों ने एक-दूसरे को उपन्ना पहनाकर सम्मान किया। विधानसभा चुनाव के दौरान अलग-अलग राजनीतिक खेमों में नजर आए दोनों नेताओं की इस तस्वीर ने भाजपा के भीतर नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी।
अगले ही दिन कांग्रेस ने दिया सियासी जवाब
राजवी-आक्या की एकजुटता की चर्चा थमी भी नहीं थी कि अगले ही दिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह जाडावत और प्रमोद सिसोदिया श्रीनाथ वाटिका में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में एक ही मंच पर नजर आए। लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक खेमों में माने जाने वाले दोनों नेताओं की मंच साझा करती तस्वीर ने कांग्रेस की सियासत में भी नए समीकरणों के संकेत दे दिए।
दो दिन, दो पार्टियां और बदलते सियासी समीकरण
लगातार दो दिनों में दोनों प्रमुख दलों के नेताओं की बदली हुई राजनीतिक तस्वीरें अब शहर की सियासत में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। भाजपा खेमे में राजवी-आक्या की नजदीकी को लेकर बनी चर्चा को कांग्रेस के जाडावत-सिसोदिया के एक मंच पर आने से नई दिशा मिल गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नेताओं के बीच दूरियां वास्तव में खत्म हुई हैं या फिर यह चुनावी रणनीति और राजनीतिक जरूरत का हिस्सा है। क्या ये नए समीकरण आने वाले चुनाव में स्थायी राजनीतिक गठजोड़ का संकेत हैं या सिर्फ चुनावी मौसम की सियासी कवायद? इसका जवाब आने वाला वक्त और चुनावी परिणाम ही देंगे।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





