4 लाख का गबन,कार्य नहीं हुआ बिल उठा लिए।

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चितौडगढ नरेन्द्र सेठिया

आयुष्मान आरोग्य मन्दिर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चिकारड़ा का मामला 4 लाख का गबन, कार्य नहीं हुआ बिल उठा लिए गए रंग रोगन नहीं हुई के रंग रोगन के बिल उठा लिए गए ऐसे कुछ और भी मामले सामने आरहे हे , फॉगिंग भी कस्बे के ग्रामीणों द्वारा करवाई गई जबकि बीसीएमओ द्वारा भुगतान उठा लिया गया है। दवाइयों का भुगतान होने के बाद भी पीएचसी पर दवाई की सप्लाई नहीं।

बीसीएमओ डूंगला, एवं अकाउंटेंट पर उठ रहे हैं सवाल
सभी का भुगतान उठा लिया गया है लेकिन धरातल पर कोई कार्य हुआ ही नहीं हे फॉगिंग, रंगरोगन जो हुआ ही नहीं हे लेकिन भुगतान पीएचसी चिकारड़ा का हो गया है।

चिकारड़ा।गंभीर अनियमितताएँ देखी जा रही हैं, जिनके कारण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) चिकारड़ा में आवश्यक सेवाओं के संचालन में काफी कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं। इसको लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कि आरएमआरएस कि कमेटी कि सदस्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचने ओर चिकित्सा अधिकारी द्वारा विभिन्न जानकारियां देने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चिकारड़ा पर 4 लाख रूपए का गबन सामने आरहा हे इसको लेकर चिकित्सा अधिकारी डॉ यतींद्र बुडानिया द्वारा जानकारी दी गई की दवाइयां की खरीद ब्लॉक स्तर द्वारा बिना अस्पतालों से मांग के या बिना जानकारी के कर ली गई, दवाइयां नियम अनुसार सर्वप्रथम सहकारी उपभोक्ता भंडार से खरीदी जा सकती हैं,अस्पताल में दवाइयों की कमी है जनता दवाई नहीं मिलने पर शिकायत कर रही है ब्लॉक स्तर द्वारा 18 मार्च को दवाई का भुगतान कर दिया गया है लेकिन आज दिनांक तक दवाई अस्पतालों में नहीं पहुंची है। संलग्न सना ब्लॉक बिल, एचडब्ल्यूसी पीएचसी चिकारड़ा पर रंग रोगन ( ब्रांडिंग )का भुगतान कर दिया गया जबकि आज दिनांक तक कोई रंग या ब्रांडिंग पीएचसी पर पिछले साल भर से नहीं हुई है 19 मार्च 2026 को भुगतान किया गया है जिसमें 1 पीएचसी के लिए 49000 का भुगतान किया गया है जबकि इस राशि से पूरी पीएचसी पर रंग करवाया जा सकता है, ब्लॉक बिल
सेक्टर में फॉगिंग का कार्य एनवीबीडीसीपी की कोई गतिविधि गतिविधि नहीं की गई फिर भी डीबीसी को बिना कार्य के भुगतान ब्लॉक द्वारा कर दिया गया है, नियम अनुसार सेक्टर इंचार्ज गतिविधियों को सत्यापित करते हैं फागण संलग्न सीना ब्लॉक बिल एनसीडी टीबीआई 2024-25 का भुगतान जान बुझ कर विलंबित किया गया उसके लिए बिल मर 2025 में ही तैयार थे ,बजट का बहाना बनाकर टाला गया जब की बजट जन 2026 में ही उपलब्ध था ,5 मार्च 2026 को सीएमएचओ ऑफिस से बजट जारी हुआ लेकिन पीएचसी के बिल नहीं लगाने दिए कारण सैलरी हेड में बजट बताया गया जबकी उसी हेड से 17 मार्च को मेडिसन व अन्य बिल ब्लॉक द्वारा अग्रेषित कर दिए गए। 27 मार्च को खंड स्तर पर 8 लाख की प्राप्ति हुई लेकिन खंड लेखाकार द्वारा किसी भी प्रभारी को यह सूचना नहीं दी गई और सारे 8 लाख के फंड का उपयोग ब्लॉक के बिलों के लिए कर लिया गया जिससे अस्पताल के खर्चे वंचित रह गए क्या अस्पतालों पर कोई खर्चा नहीं होता या उनकी कोई महत्व नहीं है जिससे वैसा सुचारू चल सके ,अस्पताल के सफाई बिल पेंडिंग है जिस से ठेकेदार कर्मचारियों को भुगतान समय पर नहीं कर पाते जिस से ऐसे अल्प वेतन भोगी सफाई कर्मचारी परेशान होते हैं। सना पर बिल पास नहीं किए जाते अनावश्यक आक्षेप लगाए जाते हैं जैसे की सील नहीं लगे एक छोटा साइन नहीं है पैड और कैंसिल की सील नहीं लगाई जबकि ब्लॉक के ताडा के बिल मात्र तीन पेज के जिसमें कोई भी दस्तावेज नहीं लगे हैं पास कर दिए जाते हैं भुगतान कर दिया जाता है अगर पीएचसी के बिल में 50 कागज चाहिए तो वह 50 कागज होने स्कैन चाहिए नहीं तो वह बिल पास नहीं किया जाता है।,
पीएचसी स्तर पर कोई अकाउंटेंट कार्यरत नहीं है जिसे ब्लॉक अकाउंटेंट की जिम्मेदारी होती है कि वह सना पर भुगतान की स्थिति फंड की उपलब्धता को एमओआईसी को सूचित करें जबकि होता यह है कि खंड लेखाकार को सूचना प्राप्त होती है वह तुरंत ब्लॉक स्तर के बिल भुगतान हेतु अग्रेषित कर दिया जाता है वर्तमान में यह स्थिति बनी हुई है कि ब्लॉक अकाउंटेंट द्वारा सर्वप्रथम ब्लॉक स्तर के बिलों को ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाता है. जिससे उपलब्ध बजट का अधिकांश भाग प्रारंभ में ही व्यय (समाप्त) हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप
पीएचसी स्तर के बिलों को अपलोड करने का अवसर ही नहीं मिल पाता है। इस कारण पीएचसी के अनेक आवश्यक
भुगतान लंबे समय से लंबित पड़े हुए हैं।चिकारड़ा सेक्टर के सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों के वित्तीय वर्ष 2025-26 के सभी बिल लंबित पड़े हुए जिस में बिजली के बिल बाकी है जिस पर एवीवीएनएल कार्यवाही के लिए बार बार बोलते है इस अनियमित प्रक्रिया का सीधा प्रभाव स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। दवाइयों की आपूर्ति, उपकरणों के रख-रखाव, दैनिक आवश्यकताओं एवं अन्य जरूरी सेवाओं से संबंधित भुगतान समय पर नहीं हो पा रहे हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि संबंधित आपूर्तिकर्ताओं एवं कर्मचारियों में भी असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो रही है, जो भविष्य में सेवाओं को और अधिक प्रभावित कर सकती है।
उपरोक्त स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि बजट के वितरण एवं उपयोग की वर्तमान प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं संतुलन का अभाव है। यदि यही स्थिति बनी रहती है, तो पीएचसी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का सुचारु संचालन प्रभावित होता रहेगा।
इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच करवाई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
– बजट वितरण की प्रक्रिया को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाए कि ब्लॉक एवं पीएचसी दोनों स्तरों को समान एव न्याय सगत स्तर मिल सके पीएचसी के लिए अलग फंड आवंटित किया जाए, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि जब भी कोई बजट स्वीकृति (सैंक्शन) जारी की जाए या अतिरिक्त राशि (बैलेंस) ब्लॉक को उपलब्ध कराई जाए, तो उसकी सूचना अनिवार्य रूप से पीएचसी स्तर पर ईमेल के माध्यम से समय पर भेजी जाए, ताकि पीएचसी स्तर से भी समय रहते आवश्यक बिल अपलोड किए जा सकें।जो सामग्री अस्पताल स्तर से संबंधित जैसे दवाएं, जांच सामग्री हो उसकी स्वीकृति सीधे पीएचसी को दी जाए ताकि सामग्री व राशि का समय से सदुपयोग हो सके जिस से आमजन को अस्पताल को सुचारु सेवाएं मिल सके यह सुनिश्चित किया जाए कि ब्लॉक स्तर पर सभी बजट का उपयोग प्रारंभ में ही न कर लिया जाए, बल्कि पीएचसी स्तर के बिलों के लिए भी पर्याप्त प्रावधान सुरक्षित रखा जाए।पीएचसी चिकारड़ा के सभी लंबित बिलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारण कराया जाए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों (जैसे पल्स पोलियो) से संबंधित भुगतानों को अत्यधिक प्राथमिकता दी जाए, ताकि ऐसे कार्यक्रमों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। इसको लेकर आरएमआरएस के कमेटी सदस्य पूर्व सरपंच राधेश्याम सोनी, मदनलाल खण्डेलवाल, लक्ष्मीलाल लोहार, जगदीश सोनी, कन्हैयालाल कुम्हार भूतपूर्व फौजी आदि मौके पर उपस्थित थे।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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