कार्तिक पूर्णिमा मेले के अंतिम चरण में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, सरयू तट पर लगा आस्था का मेला।
अयोध्या।
कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को सरयू तट पर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मेले के अंतिम चरण में ब्रह्म मुहूर्त से ही लाखों श्रद्धालु सरयू नदी के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे। इस बार श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन के कारण पिछले वर्षों की अपेक्षा कहीं अधिक संख्या में श्रद्धालुओं ने अयोध्या पहुंचकर स्नान और पूजन का पुण्य लाभ लिया।
सरयू स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने शहर के प्रमुख मंदिरों नागेश्वरनाथ, कनक भवन, हनुमानगढ़ी और रामजन्मभूमि परिसर में दर्शन कर भगवान श्रीराम, माता जानकी और बजरंगबली की आराधना की। पूरा नगर भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से सराबोर दिखाई दिया।
स्नान से मिलता है जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति
महापौर एवं तिवारी मंदिर के महंत महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि “कार्तिक पूर्णिमा के दिन सरयू में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।” उन्होंने इसे अयोध्या की आध्यात्मिक परंपरा का सबसे पावन पर्व बताया।
वहीं जगतगुरु रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि अयोध्या न केवल भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है, बल्कि यह समस्त धर्मों की साधना स्थली भी है। यहां के मंदिर और आश्रम आस्था के केंद्र हैं, जहां वर्षभर धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। उन्होंने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा का पूरा माह पवित्र माना जाता है और इसी दिन कल्पवास का समापन होता है।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था चुस्त
श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए। सरयू घाटों से लेकर प्रमुख मार्गों तक सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था रही। एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर के निर्देशन में पुलिस बल, पीएसी और ट्रैफिक पुलिस के जवान तैनात रहे। घाटों पर महिलाओं और बुजुर्गों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई। उच्चाधिकारी लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लेते रहे।
Author: Rainbow News Hindustan
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