इंद्र का अहंकार दूर करने के लिए श्री कृष्ण के कहने पर मनाया जाता है अन्नकूट का त्यौहार।

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दर्शन भवन में परंपरागत तरीके से मनाया गया अन्नकूट का त्यौहार

*इंद्र का अहंकार दूर करने के लिए श्री कृष्ण के कहने पर मनाया जाता है अन्नकूट का त्यौहार*

संजय यादव अयोध्या।

अयोध्या के जानकीघाट क्षेत्र में स्थित दर्शन भवन में पारंपरिक रूप से अन्नकूट का त्यौहार मनाया गया, इस अवसर पर मंदिर की महंत डॉ ममता शास्त्री के द्वारा मंदिर में आए हुए भक्तों एवं शुभचिंतकों को अन्नकूट का प्रसाद परोसा गया। डॉ ममता शास्त्री ने बताया कि यह परंपरा भगवान राम के वनवास से लौटने की खुशी और उनके स्वागत में मनाई जाती है, जब अयोध्यावासियों ने उन्हें विभिन्न प्रकार के व्यंजन अर्पित किए थे।अधिकारी विजय कुमार उर्फ चुलबुल बाबा ने कहा कि यह परंपरा कृष्णकाल से भी जुड़ी हुई है और भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी से भी जुड़ी हुई है,श्री कृष्ण द्वारा इंद्र के घमंड को दूर करने के लिए जब गोवर्धन पर्वत उठाया गया था तब से ही अन्नकूट त्योहार मनाने की परंपरा प्रारंभ हुई।राष्ट्रीय प्रेरणा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अशोक मिश्रा ने कहा कि यह पर्व भगवान राम के प्रति प्रेम प्रकट करने हेतु अयोध्यावासी मानते हैं। भगवान कृष्ण ने गाँव वालों को तूफ़ान और बारिश से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था, इसलिए सभी गाँव वालों ने उन्हें प्रसाद के रूप में तरह-तरह के व्यंजन बनाए।अन्नकूट का प्रसाद पाने वाले सैकड़ो की संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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