हनुमान जयंती महोत्सव में गूंजी श्रीराम कथा, हनुमानजी के चरित्र से युवाओं को मिली प्रेरणा।

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रामकाज किन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम
हनुमान जयंती महोत्सव में गूंजी श्रीराम कथा, हनुमानजी के चरित्र से युवाओं को मिली प्रेरणा

अयोध्या।

सिद्ध पीठ कटरा कुटी धाम में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव के दूसरे दिन कथा व्यास मिथिलाशरण पांडे जी ने हनुमानजी को रामकथा के सर्वोत्तम श्रोता और उपासक बताया। उन्होंने कहा, रामकाज किन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम जैसी भावना से आज के युवाओं को सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हनुमानजी ने प्रभु श्रीराम के समस्त कार्य निस्वार्थ भाव से किए और कभी भी अपने नाम या यश की आकांक्षा नहीं की। सुंदरकांड को हनुमानजी के जीवन चरित्र का सर्वोत्तम चित्रण बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके पाठ से बड़ा प्रतिफल प्राप्त होता है। कथा में तुलसीदास जी और हनुमानजी के बीच सद्गुरु भाव पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया।कथा में माता सीता के लंका आगमन को प्रतिबिंब रूप बताया गया, और कहा गया कि सत्य स्वरूप को मौन और संभाल के रखा जाता है, उसे प्रचारित नहीं किया जाता।
प्राकृतिक आपदाओं की चर्चा करते हुए व्यास जी ने श्रोताओं को चेताया कि अगर हम प्रकृति के प्रति सचेत नहीं हुए, तो भविष्य संकटमय हो सकता है। कथा में प्रभु की बाल लीलाओं को मधुर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर महंत चिन्मयानंद महाराज, यज्ञाचार्य दयासागर शास्त्री त्रिपाठी, मुख्य यजमान डॉ. सुशीला रानी पांडे, रामगोपाल सिंह, डॉ. अरुण सिंह, विनोद कुमार गुप्ता, भुवनेश्वर शास्त्री, राका शर्मा, परशुराम शर्मा, विजय सोनी, दरोगा सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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