चित्तौडगढ से नरेन्द्र सेठिया की रिपोर्ट
आस्था की नगरी मंडफिया में अंधेरगर्दी!
श्रद्धालुओं के शौचालय पर चला बुलडोजर, लाखों का निर्माण जमींदोज, प्रशासन मौन
*Location: मंडफिया, सांवलिया जी | चित्तौड़गढ़*
मैं कलम हूँ… सत्ता के दरबार की नहीं, जनता की आवाज हूँ।
मेवाड़ के सुप्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलियाजी की पावन नगरी मंडफिया में इन दिनों विकास के नाम पर जो तमाशा चल रहा है, उसने श्रद्धालुओं की आस्था और जनता के पैसों का मज़ाक बनाकर रख दिया है।
2 : श्रद्धालुओं के लिए बने शौचालयों पर चला बुलडोजर, जल्दबाजी क्यों?*
ताजा मामला सांवलियाजी मंदिर के समीप पार्किंग स्थल के पास का है, जहाँ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करीब 10 साल पहले मंदिर मंडल द्वारा ही सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था।
हैरानी की बात यह है कि मंदिर मंडल प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व योजना या सार्वजनिक सूचना के इन शौचालयों को जेसीबी की मदद से रातों-रात जमींदोज कर दिया।
तोड़फोड़ में इतनी जल्दबाजी दिखाई गई कि वहां लगे नल, पाइपलाइन, बिजली कनेक्शन और दरवाजों तक को सुरक्षित बाहर निकालने की जहमत नहीं उठाई गई। सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि जिन शौचालयों के इलेक्ट्रिक सामान और नलों को हाल ही में संपन्न हुए मेले से ठीक पहले दुरुस्त करवाया गया था, उन्हें भी बिना सोचे-समझे मलबे में मिला दिया गया। जनता के पैसे से बने इन निर्माणों को नेस्तनाबूद करने से स्पष्ट राजकोषीय हानि हुई है।
3 : विकास का कौन सा मॉडल या रसूखदारों को बचाने का खेल?
मंदिर मंडल की इस तोड़फोड़ नीति के पीछे कौन सी कार्ययोजना है, इसकी कोई भी रूपरेखा, स्वीकृति या लागत जनता के सामने सार्वजनिक नहीं की गई है। स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, जिस क्षेत्र में इन शौचालयों को तोड़ा गया है, उसी के आसपास नाले पर बने निजी होटलों और अवैध निर्माणों पर प्रशासन की आंखें पूरी तरह बंद हैं।
रसूखदारों के अवैध निर्माणों को बचाने के लिए यदि जनता और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बलि चढ़ाया जा रहा है, तो यह प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर एक बहुत बड़ा कलंक है।
*VO – 4 : लूट और संरक्षण की राजनीति में पिसती जनता*
मंडफिया में चाहे तालाबों का अस्तित्व मिटाना हो, बरसाती नालों की दिशा बदलकर चहेतों को फायदा पहुंचाना हो, या फिर मंदिर मंडल की संपत्तियों और शौचालयों को जमींदोज करना हो – यह सब इस बात का प्रमाण है कि आम जनता और भगवान के भक्तों की आस्था का दोहन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती।
*CLOSING – जनता की मांग*
सांवलियाजी की यह नगरी केवल एक व्यापारिक केंद्र या राजनीतिक अखाड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों आस्थावानों का तीर्थ है। जनता की तीन बड़ी मांगें हैं –
1. श्वेत पत्र जारी हो -* शौचालयों को अचानक तोड़ने के पीछे के वास्तविक कारणों, लागत के नुकसान और मंदिर मंडल की कार्ययोजना को सार्वजनिक किया जाए।
2. पक्षपात की जांच हो -* एक तरफ जनहित के शौचालयों को तोड़ना और दूसरी तरफ उसी क्षेत्र में नाले पर बने अवैध होटलों को संरक्षण देना, इस दोहरे रवैये की निष्पक्ष जांच हो।
3. जवाबदेही तय हो -* जनता के धन की बर्बादी और मंदिरों की व्यवस्थाओं के साथ खिलवाड़ करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432



