अयोध्या।
रामनगरी अयोध्या के विकास मॉडल का नया नमूना देखना हो, तो ज़रा मधुसूदन स्कूल से लोटनी भवानी मंदिर स्कूल तक चले आइए।* अयोध्या *विकास प्राधिकरण* के ‘इंजीनियरिंग *कलाबाज़ियों’* की ऐसी जीती-जागती मिसाल मिलेगी कि आप अपना माथा पकड़ लेंगे! *यहाँ सड़क ऐसी बनी है कि कहीं आसमान छू रही है, तो कहीं ज़मीन में धंसी हुई है!* मानो ठेकेदार साहब ने सड़क नहीं, बल्कि आने वाली बारिश में *पूरे मोहल्ले को डुबाने के लिए ‘वॉटर पार्क’ का पक्का इंतज़ाम कर दिया हो।* ऊंचे-नीचे सीवर और हादसों का खुला न्योता! सड़क के साथ-साथ सीवर के ढक्कन कहीं फुट ऊपर हैं, तो कहीं पाताल में! *कई जगह सीवर के पत्थर ही खुले पड़े हैं।* रात के अंधेरे में राहगीर पैदल चले या गाड़ी चलाए, *हर कदम पर अस्पताल पहुँचने की पूरी तैयारी है।* एक महीने से निर्माण का खेल जारी है, लेकिन *किस मानक पर सड़क बन रही है, इसकी सुध लेने वाला कोई अफ़सर मौके पर नज़र नहीं आता।*
पार्षद प्रतिनिधि *महेंद्र शुक्ला जी*
चिल्ला-चिल्लाकर थक गए कि *सड़क मानकों की धज्जियां उड़ाकर बन रही है, लेकिन साहब लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती!* सीधा और चुभता सवाल:
अजी साहब! *अगर सरकारी धन से बन रही सड़क का यह हाल है, तो क्या अफ़सर किसी बड़े हादसे या फिर पहली ही बारिश में जनता के उग्र आंदोलन का इंतज़ार कर रहे हैं?*
अगर सब कुछ सही है तो अफ़सर मौके का मुआयना क्यों नहीं करते? या *फिर कागज़ों पर विकास का ‘ओके’ लिखकर अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया गया है?* साहब! जनता के टैक्स के पैसे से बनी सड़क गड्ढे भरने के लिए होनी चाहिए, *न कि हादसों को न्योता देने और जलभराव बढ़ाने के लिए!*
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





