भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्वपूर्ण स्थान – माली
देसूरी,पाली।
भारतीय संस्कृति में गुरु का महत्वपूर्ण स्थान है ।गुरु हमें अज्ञान रुपी अंधकार से ज्ञान रुपी प्रकाश की ओर से ले जाता है।हम गुरु के प्रति श्रद्धा रखते हुए उनका सम्मान करें।यह हमारा कर्त्तव्य है।उक्त उद्गार अतिरिक्त मुख्य ब्लाक शिक्षा अधिकारी देसूरी विजय सिंह माली ने निकटवर्ती राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढालोप में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से आयोजित गुरु पूर्णिमा उत्सव में व्यक्त किए।
माली ने कहा कि भारत में गुरु शिष्य परंपरा सनातन काल से प्रचलित रही है। सच्चा गुरु अपने शिष्य के सर्वांगीण विकास के लिए सदैव तत्पर रहता हे।उन्होंने अखिल भारतीय साहित्य परिषद की इस आयोजन के लिए सराहना करते हुए कहा कि आज के परिवेश में इसकी प्रासंगिकता बढ़ी है।इस अवसर पर उपप्राचार्य विष्णु प्रसाद व व्याख्याता राजेंद्र प्रसाद ने भी गुरु के महत्व व महर्षि वेद व्यास के व्यक्तित्व कृतित्व पर विचार व्यक्त किए।स़ंस्था प्रधान सोहनलाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।मंच संचालन राजेंद्र परिहार ने किया।
इस अवसर पर रमेश कुमार वैष्णव,दिलीप सिंह देवल,तारा कुमावत,गिरधारी लाल,बसंत कुमार गर्ग,गजेंद्र कुमार दहिया,अशोक कुमार,ब्रजपाल सिंह,कमलेश पंवार व अजय राज सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
उल्लेखनीय है।
उल्लेखनीय है कि महर्षि वेदव्यास के जन्मदिन आषाढ़ पूर्णिमा को गुरुपूर्णिमा के रुप में मनाया जाता है।
Author: Rainbow News Hindustan
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