चित्तौडगढ से नरेन्द्र सेठिया की रिपोर्ट
चित्तौडगढ के कपासन के तहसील के जाश्मा से ढाणी गांव के बीच खेतों की तारबंदी में एक लेपर्ड फंस गया। जो की शुक्रवार दिन में तीन बजे स्थानीय मवेशी चराने वाले को दिखाई दिया।
लेपर्ड के तारबंदी फंसे होने की सूचना बिजली की तेजी से आसपास के इलाकों में फैल गई और वहां ग्रामीणों की भीड़ एकत्रित हो गई। इसकी सूचना वन विभाग को दी गई।
सूचना पर उप वन संरक्षक राहुल झांझरिया के निर्देश पर कपासन रेंजर सुरेश चौधरी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जहां एक लेपर्ड तारबंदी में बुरी तरह फंसा हुआ था एवं हिलडूल भी नहीं पा रहा था। लेपर्ड पूरी तरह से वयस्क होकर अच्छी कद काठी का था जिसे बिना ट्रेंकुलाइज किये रेस्क्यू कर पाना मुश्किल था। इसलिए चित्तौड़गढ़ मुख्यालय से भी वन विभाग की वन सुरक्षा टीम और चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य मौके के लिए रवाना हुए।
रात करीब 10.30 बजे शुरू हुए इस रेस्क्यू ऑपरेशन में मनोहर सिंह जाट द्वारा लेपर्ड को ट्रेंकुलाइज्ड किया गया एवं उसके बाद बड़ी सावधानी से एक एक करके सारे तार काट कर लेपर्ड की आजाद कराया गया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरा करने में टीम को लगभग तीन घंटे का समय लगा।
रेस्क्यू उपरांत लेपर्ड का मेडिकल चेकअप कर बस्सी ले जाया गया। जहां उसे शनिवार सुबह छोड़ दिया गया। रात के अंधेरे में टॉर्च की लाइट में चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में रेंजर सुरेश चौधरी के साथ नाथू सिंह, सत्यवीर, नाना लाल, ललित, मेघनाथ और वन्य जीव प्रेमी पीयूष कांबले, मुबारिक खान, राम कुमार साहू और मयूर गोसावी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
Author: Rainbow News Hindustan
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