बाल सम्प्रेक्षण गृह के किशोरों को मिली रचनात्मकता की नई दिशा।
पाँच दिवसीय ग्रीष्मकालीन लोक चित्रकला कार्यशाला का सफल आयोजन
अयोध्या धाम। उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) एवं राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) अयोध्या के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 23 मई से 27 मई 2026 तक आयोजित पाँच दिवसीय ग्रीष्मकालीन लोक चित्रकला कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य किशोरों के भीतर छिपी रचनात्मक प्रतिभाओं को विकसित करना, भारतीय लोक कला एवं संस्कृति से जोड़ना तथा उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन लाना रहा।
कार्यशाला का संयोजन एवं प्रशिक्षण प्रसिद्ध लोक चित्रकला प्रशिक्षक श्री अमित कुमार भारती द्वारा किया गया। उनके मार्गदर्शन में राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) अयोध्या में रह रहे लगभग 30 किशोरों ने विभिन्न लोक चित्रकलाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को पारंपरिक भारतीय लोक कला की बारीकियों, रंगों के प्रयोग, रेखांकन एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की जानकारी दी गई।
श्री अमित कुमार भारती ने बताया कि कला केवल चित्र बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और मानसिक विकास का सशक्त साधन है। उन्होंने कहा कि ऐसे किशोर, जो किसी न किसी परिस्थिति या कारणवश बाल सम्प्रेक्षण गृह में रह रहे हैं, यदि उन्हें सकारात्मक वातावरण, मार्गदर्शन और रचनात्मक अवसर प्राप्त हों तो वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक आगे बढ़ सकते हैं। कार्यशाला के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, धैर्य, सृजनात्मक सोच एवं सामाजिक व्यवहार विकसित करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के दौरान किशोरों ने अत्यंत उत्साह और रुचि के साथ लोक चित्रकला का अभ्यास किया। बच्चों की कल्पनाशक्ति एवं कलात्मक अभिव्यक्ति ने सभी को प्रभावित किया। कार्यशाला में उन्हें यह अनुभव कराया गया कि कला मनुष्य के भीतर छिपे तनाव, नकारात्मकता और अकेलेपन को दूर कर नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच प्रदान करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सांस्कृतिक एवं रचनात्मक गतिविधियाँ बाल सम्प्रेक्षण गृह में रह रहे किशोरों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। ऐसे कार्यक्रम उनके मानसिक एवं भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा उन्हें अपराध और नकारात्मक सोच से दूर कर समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं। कला और संस्कृति के माध्यम से बच्चों के भीतर संवेदनशीलता, आत्मसम्मान और नई जीवन दृष्टि विकसित होती है।
कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रशिक्षक श्री अमित कुमार भारती ने बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों की सराहना करते हुए कहा कि यदि इन बच्चों को निरंतर मार्गदर्शन और अवसर मिलता रहे तो भविष्य में वे कला के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि प्रत्येक बच्चे के भीतर प्रतिभा मौजूद होती है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने और सही दिशा देने की होती है।
यह पाँच दिवसीय लोक चित्रकला कार्यशाला न केवल बच्चों के कौशल विकास का माध्यम बनी, बल्कि उनके जीवन में आशा, आत्मविश्वास और नई सकारात्मक दिशा का संदेश भी छोड़ गई।
Author: Rainbow News Hindustan
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