चितौडगढ नरेन्द्र सेठिया
भादसोड़ा में ऐतिहासिक रहा शिवाचार्य संयम प्रकाशोत्सव।
श्रमण संघीय युवाचार्य प्रवर श्री महेंद्र ऋषि जी महाराज साहब ने भादसोड़ा श्री संघ में बहु मंडल एवं बालिका मंडल के स्वागत गीत से प्रारंभ आचार्य सम्राट पूज्य डॉ शिव मुनि जी महाराज साहब के 55 वे पावन दिक्षा दिवस के अवसर पर फरमाया कि शिवाचार्य भगवान का जन्म नाम ही उनके माता-पिता द्वारा शिवकुमार दिया गया। पंजाब के मंगल देश में मलोट मंडी का वह धार्मिक परिवार जिसे बच्चे को जन्म से ही धार्मिक संस्कार संस्कार प्रदान किया साधु संतों के साथ जाकर गौचरी आदि करवाना उनके संपर्क में रहना और उनकी चरिया को जानना शिवकुमार के प्रमुख विशेषता थी। जैसे-जैसे बड़े हुए उनकी उच्च शिक्षा धार्मिक अध्ययन और मैधावी मस्तिष्क नित्य नहीं जिज्ञासाएं पैदा करता था। उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए। वहां भी अपने सामायिक उपकरण साथ में। नित्य सामायिक करना आपकी दिनचर्या का प्रमुख अंग था। 1972 में जब आपकी दीक्षा हो गई। अध्ययन शीलत्ता आगे बढ़ती गई। स्थानक वासी संतों में आप प्रथम पीएचडी हुए। पीएचडी करने के बाद भी शिव मुनि जी रुके नहीं। फिर उनकी जिज्ञासा बढ़ी भगवान महावीर स्वामी कौन सा ध्यान करते थे। वह स्वयं तीर्थंकर फिर भी ध्यानस्थ रहते थे? शोध चला रहा। ब्यावर के एक श्रावक की प्रेरणा से वर्षितप प्रारम्भ किया। ज्यादा गर्मी और शारीरिक परिस्थितियों के कारण बीच में छूट गया फिर उन्ही श्रावक जी के कहने पर पुनः शाह वर्षीतप प्रारंभ किया जिसे 40 वर्ष पूर्ण हो गए। उनके आत्म ध्यान साधना, उनके उत्कृष्ट जीवन, 1200 से अधिक साधु साध्वी जी का नेतृत्व करते हुए भी स्वयं की आत्म साधना से कभी समझौता नहीं किया । ऐसे महान शिवाचार्य भगवन की दीक्षा जयंती मन कर हम गुना अनुवाद के साथ अपने में गुण विकसित करने का संकल्प 55 सी दीक्षा जयंती पर
55 सामायिक, 55 दिन रात्रि भोजन त्याग, 55 दिन जिमिकंद का त्याग, 55 दिन 55 मिनिट से अधिक मोबाइल नहीं देखना, ₹5500 या 55000 जीव दया में दान करें। जैसी जिसकी भावना हो दीक्षा जयंती पर संकल्प लें। तो जयंती मनाना सार्थक हो जाएगा।
इस अवसर पर मेवाड़ उप प्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री कोमल मुनि जी महाराज साहब ने आचार्य भगवान की महानता विद्वता सरलता सौम्यता और उत्कृष्ट जीवन के गुणों का विवेचन करते हुए गुणानुवाद किया। महासती श्री नव्या जी महाराज साहब और काव्या जी महाराज ने गुना अनुवाद करते हुए गीतिका प्रस्तुत की। गुजराती अजरा अमर संप्रदाय के आचार्य भाव चंद्र जी महाराज साहब की सुशिष्या श्री हंस कुमारी जी महाराज साहब दोनों आचार्य के मधुर मिलन एवं शिवाचार्य की महानता पर प्रकाश डाला। कई संघों के प्रतिनिधियों ने अपने भक्ति भाव व्यक्त किये। युवाचार्य जी एवं उप प्रवर्तक श्रीजी की प्रेरणा से सैकड़ो श्रावक श्राविकाओं ने जीव दया में राशि लिखवा कर लाभ लिया। इस अवसर पर सभी महापुरुषों के सानिध्य में गौशाला में गोखरू परिवार द्वारा युवाचार्य करुणाघर काशीलन न्यास किया गया। संघ मंत्री श्री रमेश जी चंडालिया ने कहा कि श्री संघ का असीम सौभाग्य है कि शिवाचार्य दीक्षा जयंती युवाचार्य भगवन उप प्रवर्तक श्रीजी श्री हितेंद्र ऋषि जी महाराज साहब महा सती दिव्य ज्योति जी महाराज साहब महासती श्री सुचेता जी महाराज साहब महा सती श्री हंस कुमारी जी महाराज साहब आदि महान संत संत सतियाजी ठमहाराज साहब के पावन सानिध्य में मनाने का अवसर मिला बाहर से पधारे सभी संघों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम का सफल संचालन हिट मितवाशी पूज्य गुरुदेव श्री हितेंद्र ऋषि जी महाराज साहब ने किया।
Author: Rainbow News Hindustan
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