विहार पैदल यात्रा और निरंतर चलते रहने की जीवनशैली है।:जैन

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विहार पैदल यात्रा और निरंतर चलते रहने की जीवनशैली है।:जैन
*आज विहार सेवा ग्रुप फालना के सदस्य प्रफुल्ल जैन ने साध्वी संयमशीला जी के विहार में आपने विहार सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि जैन धर्म में विहार का मतलब साधु साध्वियो द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक पैदल यात्रा करना है यह उनकी दिनचर्या का एक अभिन्न अंग है इस अवसर पर उन्होंने विहार के अर्थ बताए जिसमें पैदल भ्रमन,निरंतर चलना,अपवाद (चतुर्मास) इसमें केवल वर्षा ऋतु के दौरान साधू साध्वी एक ही स्थान पर रुकते हैं हैं जिससे चातुर्मास् या वर्षायोग कहा जाता है ताकि बारिश के समय छोटे जीवों की हत्या न हो। विहार सेवा ग्रुप का मुख्य उद्देश्य गुरु भगवंतों के साथ चलना उनको विहार के समय कोई भी प्रकार की कठिनाई नहीं हो और गंतव्य स्थान तक जा कर विश्राम, व्यवस्था एवं गोचरी की व्यवस्था करवाना गुरु भगवंतों की सेवा करना मुख्य उद्देश्य हैं इस अवसर पर फालना जैन संघ के ट्रस्टी अमित मेहता,विहार सैनिक प्रफुल जैन,महेन्द्र सुंदेशा,अशोक मुठलिया,धनराज जैन कोयंबतूर आदि लोग उपस्थित रहे*

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

Mo.9414526432

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