चितौडगढ नरेन्द्र सेठिया
भादसोड़ा
भारत विश्व गुरु था आगे भी विश्व गुरु बनेगा स्क्रम को आगे बढ़ाने के लिए सरकार को समान शिक्षा नीति लाने की सख्त जरूरत है। एक स्वस्थ सरकार को शिक्षा स्वास्थ्य और न्याय की व्यवस्था को सुधारना अति आवश्यक है। भारत देश में अनेक आक्रांताओं ने यहां हमले किए और भारत पर राज किया और हमारे भारत में उन्होंने हमारी सभ्यता को नष्ट करके अपना नाम दिया । आज हम भारत में या दिल्ली में कहीं घूमते हैं तो लगता है कहीं पाकिस्तान में घूम रहे हैं महानगरों और रोड़ों के नाम हमारे महापुरुषों के नाम पर थे बदलकर हुमायूं रोड अकबर रोड जैसे नाम दे दिए गए और हमारी सरकारे उनका नाम आजाद होने के बाद भी पुनः बदल नहीं सकी। चीन भी गुलाम था और चीन की सरकार ने चीन में गुलामी के किसी भी नामोनिशान को नहीं रहने दिया। लेकिन भारत की विडंबना है कि आज तक भारत में सुधार नहीं हुआ। वर्तमान समय में बाहरी देशों में युद्ध चल रहे हैं सभी प्रतिस्पर्धा और अपने आप को श्रेष्ठ साबित करने के लिए अपने आप को श्रेष्ठ साबित करने की लड़ाइयां लड़ रहे हैं इस मानसिकता को बदलने की आवश्यकता है। वसुधैवकुटुंबकम की भावना किसी में नहीं है यह भावना सिर्फ भारत में है। पृथ्वी पर प्राणी मात्र को जीने का अधिकार है कोई भी किसी का भी दमन करें यह पाप है। प्रकृति की सेवा ही मां भगवती की सेवा है। हमें वृक्षों को नदियों को पहाड़ों को पशु पक्षियों को सभी को शाराक्षण देना है उनकी रक्षा करना है और प्रकृति को बचाना है यही हमारी मां भगवती की पूजा है। आज मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का अंधाधुंध दोहन कर रहा है पर्वत पठार खत्म कर दिए गए नदियों को खराब कर दिया गया दूषित जल प्रवाहित कर दिया गया नदियों का अंधाधुंध खनन किया जा रहा। हमें अपने आने वाली पीढ़ी के लिए जल को बचाना होगा वरना हमारी आने वाली पीढ़ी पानी के बिना अपना जीवन जी नहीं पाएगी। आज जल का दोहन अंधाधुन हो रहा है 300 400 मीटर तक ट्यूबवेल खोदी जा रही है। भारत में वृद्ध आश्रमों की आवश्यकता नहीं है यह पाश्चात संस्कृति है भारत में माता-पिता के साथ ही बेटा घर गृहस्ती जीवन पर्यंत तक चलती है वृद्ध आश्रम पश्चात संस्कृति है वहां पर माता-पिता अपनी औलाद को अपने साथ नहीं रखते और औलाद भी माता-पिता को अपने साथ नहीं रखती क्योंकि उनका यह स्थाई संबंध नहीं होता है उनके संबंध बदलते रहते हैं । लेकिन भारत में ऐसी व्यवस्था नहीं है। हमारे देश में फादर्स डे मदर्स डे जिससे प्रचलन बढ़ रहे हैं। भारत में पश्चात संस्कृति को बढ़ाया जाएगा तो भारत का पतन होगा। किसान खेतों में अंधाधुंध उड़िया डाल करके उत्पादन बढ़ा रहा है इससे समाज में कैंसर जैसी घातक बीमारियां उत्पन्न हो रही है हमें इस पर कंट्रोल करना होगा और हमें हमारी पुरानी पद्धति पर आना होगा खेतों में देसी खाद गोबर गोमूत्र का प्रयोग करना होगा। यह विचार बागुंड स्थित चामुंडा माता मंदिर पर खेरी वाले संत शिवराम दास जी महाराज के सानिध्य में चल रहे सत चंडी महायज्ञ कलश स्थापना दिवस कार्यक्रम के तहत श्रीमद् देवी भागवत कथा के दौरान मुगाना धाम आश्रम के महंत अनुज दास महाराज ने कहे । कथा प्रवचन में राजा हिमाचल पार्वती जी कि भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या तारकासुर वध आदि कथाएं व्यास पीठ से सुनाई
गई। कथा प्रवचन के दौरान प्राकट्य स्थल सांवलिया जी मंदिर के ओसरा पुजारी चंदू दास महाराज के द्वारा कथा व्यास महंत अनुज दास महाराज का ऊपरना शॉल एवं नोटों की माला से सम्मान किया गया। कथा प्रवचन में आसपास के क्षेत्र के कई ग्रामीण महिलाएं पुरुष लाभ ले रहे हैं कथा प्रवचन स्थल पर प्रतिदिन विख्यात नाम कलाकारों के द्वारा भजन संध्या का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन भंडारे का आयोजन।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





