आत्मकल्याण हेतु आव्हान करती हैं मंदिर के शिखर पर लहराती ध्वजा।

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आत्मकल्याण हेतु आव्हान करती हैं मंदिर के शिखर पर लहराती ध्वजा।

केसरीयाजी नगर फालना,पाली

जैनाचार्य श्रीमद विजय रत्नसेन सूरीश्वरजी आदि साधु-साध्वी भगवंतों की शुभ निश्रा में मातुश्री सुखीबाई छगनलालजी धोका परिवार द्वारा केसरीयाजी नगर–फालना में निर्मित श्री केसरीयाजी आदिनाथ जिनालय की 25वीं ध्वजारोहण प्रसंग में आज तीसरे दिन आज प्रातः 10.30 बजे धर्मसभा का आयोजन हुआ । धर्मसभा में जैनाचार्यश्री ने प्रवचन देते हुए कहा कि –

कुदरत की ओर से एक दिन में 24 घंटे की भेंट सभी जीवों को एक समान दी गई है । चाहे राष्ट्रपति हो, कि एक कर्मचारी हो, चाहे गृहस्थ हो, या साधु हो, सभी को दिन में 24 घंटे एक समान प्राप्त होते है। इन 24 घंटों का सदुपयोग करना या दुरुपयोग करना, ये हम पर निर्भर है । हम मात्र शरीर ही नहीं, हमारे भीतर आत्मा भी है । आत्मा के अस्तित्व होने के कारण ही शरीर का संचालन होता है। यदि शरीर में से आत्मा निकल जाए, तो इस शरीर की कोई कीमत नहीं है । परंतु दिन भर के 24 घंटों में से हमारा अधिकांश समय शरीर की चिंता में ही व्यतीत होता है। आत्मा के लिए समय ही नहीं निकलता है।

मंदिरजी के शिखर पर लहराती ध्वजा हमें आत्मिक शांति के लिए आव्हान करती है। यदि आत्मिक शांति और शुद्धि की चाहना हो, तो शिखर के नीचे रहे हुए परमात्मा का आलंबन लेना जरूरी है। परमात्मा के आलंबन के बिना संसार में अन्यत्र कहीं पर भी आत्मिक शांति प्राप्त नहीं हो सकती ।

प्रवचन के पश्चात मंदिरजी में सत्रहभेदी पूजा पढ़ाई गई । नौवीं ध्वजा पूजा के साथ विजय मुहूर्त में बड़े हर्षोल्लास के साथ शिखर पर 25वीं ध्वजा चढ़ाई गई । ध्वजारोहण के बाद सकल संघ का स्वामिवात्सल्य हुआ। मंदिरजी के बाहर 12 फीट की विविध धान्यों से ध्वजारोहण – शिखर की रंगोली बनाई गई।

दि. 27 जनवरी से बाली नगर में जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी के संयम जीवन के 50 वें वर्ष में मंगल प्रवेश निमित्त पाँच दिवसीय “सर्व विरति स्वर्ण महोत्सव” भव्य कार्यक्रम महोत्सव होगा । जैनाचार्यश्री ने अपने संयम जीवन में अधिकांश समय में श्रुतज्ञान की साधना करते हुए सर्वाधिक जैन हिन्दी साहित्य का निर्माण किया है । साथ ही 49 वर्ष के 17895 दिनों में 632 उपवास, 685 आयंबिल एवं 15203 एकासणा ताप की आराधना की है।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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