देसूरी के ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन कर देसूरी के इतिहास को जाना।

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देसूरी के ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन कर देसूरी के इतिहास को जाना।
देसूरी,पाली।

इतिहास संकलन समिति मरु क्षेत्र जोधपुर व श्री वीर बीकाजी सोलंकी राजपूत संस्थान देसूरी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इतिहास अध्ययन यात्रा के दूसरे चरण में देसूरी के शैली माता,नामा माता,चौधरा माता, रेली माता मंदिर समेत प्राचीन दरवाजों, बावड़ियों का अवलोकन कर रिपोर्ट तैयार की। इतिहास संकलन समिति मरु क्षेत्र जोधपुर के प्रांत उपाध्यक्ष व इतिहासविद् विजयसिंह माली के नेतृत्व में इतिहासज्ञ परबतसिंह सोलंकी, अजयपाल सिंह व मांगू सिंह सोलंकी ने देसूरी के सोलंकी वंश व वीर शिरोमणि बीकाजी सोलंकी से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों यथा शैली माता,नामा माता,चौधरामाता व रेली माता के प्राचीन मंदिर, दरवाजों -नाल दरवाजा,जंगलात दरवाजा व बावड़ियों -चंपा बाव,सरदार बाव, पगलिया बाव,तेजबाव का अवलोकन कर परस्पर विचार विमर्श कर रिपोर्ट तैयार की। अध्ययनदल ने इतिहास संकलन समिति द्वारा की जा रही इतिहास अध्ययन यात्रा के उद्देश्य को बताते हुए सेवानिवृत्त शिक्षक 85वर्षीय छोटा लाल शर्मा से देसूरी के इतिहास को लेकर चर्चा की। शर्मा ने अध्ययन दल को देसूरी के गौरवशाली इतिहास के स्वर्णिम पन्नों की जानकारी दी । इतिहास अध्ययन यात्रा के माध्यम से पुरातात्विक व ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर देसूरी के गौरवशाली इतिहास को आमजन के समक्ष लाया जाएगा।गत वर्ष 14 दिसंबर को भी इतिहास अध्ययन यात्रा की गई थी।
उल्लेखनीय है कि मेवाड़ के महाराणा रायमल के समय मादरेचों को हराकर देसूरी पर सोलंकियों ने आधिपत्य कर ईस्वी सन् 1479ईस्वी में रायमल सोलंकी देसूरी पाट गद्दी पर बैठे। देसूरी के सोलंकियों ने मुगल प्रतिरोध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

Mo.9414526432

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