कोजुन्दा–भाटखेड़ा सीमा पर अवैध खनन का कहर, ग्रामीणों का कलेक्ट्रेट पर आक्रोश प्रदर्शन।

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चित्तौडगढ से नरेन्द्र सेठिया

अवैध खनन का कहर
ग्रामीणों की जान पर संकट

कोजुन्दा–भाटखेड़ा सीमा पर अवैध खनन का कहर,
ग्रामीणों का कलेक्ट्रेट पर आक्रोश प्रदर्शन।

चित्तौड़गढ़।
जिले के ग्राम कोजुन्दा व भाटखेड़ा की सीमा क्षेत्र में खनन माफियाओं द्वारा किए जा रहे अवैध खनन ने ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। बुधवार को आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला कलक्टर आलोक रंजन को ज्ञापन सौंपते हुए अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों ने बताया कि बीते कई दिनों से क्षेत्र में अवैध रूप से विस्फोट कर खनन किया जा रहा है। प्रतिदिन हो रहे धमाकों से गांव के आसपास बने मकानों की दीवारों में दरारें आ रही हैं और उनके गिरने का खतरा बना हुआ है। खनन माफिया द्वारा दिन-रात भारी ट्रक व ट्रैक्टर तेज गति से गांव के अंदर से निकाले जा रहे हैं, जिससे आमजन का सड़कों पर चलना तक मुश्किल हो गया है। सड़कों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि पैदल निकलना भी दूभर हो गया है।

अवैध खनन से क्षेत्र का पर्यावरण भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। धूल और प्रदूषण के कारण आसपास के गांवों में लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि माफियाओं ने जमीन को 150 से 200 फीट तक खोद डाला है, जिससे आसपास के कुओं और ट्यूबवेल का जलस्तर तेजी से गिर गया है। कृषि भूमि बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे किसानों के लिए खेती करना कठिन हो गया है। खनन से उड़ने वाली धूल और कंपन के कारण फसलें खराब हो रही हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि खनन से निकलने वाले अपशिष्ट को उपजाऊ कृषि भूमि में डाला जा रहा है। खुले में पड़े इस अपशिष्ट को मवेशी खा रहे हैं, जिससे कई मवेशी बीमार होकर मर चुके हैं। खनन क्षेत्र में बने गहरे गड्ढों में आए दिन मवेशियों के गिरने से उनकी मौत हो रही है। इसके अलावा हजारों पेड़-पौधों की कटाई कर प्रकृति को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने अवैध खनन का विरोध किया और अनुमति के बारे में पूछा, तो खनन माफियाओं ने उन्हें जान से मारने की धमकियां दीं। माफियाओं ने कथित तौर पर कहा कि वे किसी थाने-कचहरी से नहीं डरते और प्रशासन को अपनी जेब में रखते हैं। विरोध करने पर हाथ-पैर तोड़ने और लोगों को खनन के गड्ढों में फेंक देने जैसी धमकियां दी गईं, जिससे गांव में भय का माहौल है।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि खनन माफिया कभी खुद को चित्तौड़गढ़ तो कभी भीलवाड़ा का बताकर प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि प्रशासन माफियाओं की पहचान कर उनके खिलाफ ठोस और प्रभावी कानूनी कार्रवाई करे, ताकि अवैध खनन पर स्थायी रूप से रोक लग सके और पर्यावरण की रक्षा हो सके।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि भविष्य में किसी भी उपजाऊ भूमि पर अवैध खनन न हो और लालच के कारण प्रकृति व पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। ज्ञापन सौंपते समय ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

Mo.9414526432

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