मन में किसी के लिए करूणा और मैत्री की भावना रखना एक अच्छे व्यवहार की निशानी माना जाता है,आचार्य।

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मन में किसी के लिए करूणा और मैत्री की भावना रखना एक अच्छे व्यवहार की निशानी माना जाता है,आचार्य।

फालना,पाली

चातुर्मास् विहार के पश्चात आज फालना विश्वचंद सुरिश्वर आराधना भवन में विराजमान आचार्य जयप्रभ विजयजी मारा साहिब ने आज कहा कि अगर भगवान की कृपा होगी तो भक्त अपने भजन से अपने लिए कुछ नहीं माँगेगा,वह उस भजन-कीर्तन से दूसरों की सुख शांति की कामना करेगा.किसी भी व्यक्ति से संबंध न रखते हुए सबके साथ दया की भावना रखना भी भगवान के साथ होने का शुभ संकेत है.मन में किसी के लिए करूणा और मैत्री की भावना रखना एक अच्छे व्यवहार की निशानी माना जाता है कि आचार्य श्री का 3 दिन से फालना प्रवास पर है इस अवसर पर अमित मेहता,प्रकाश तारावत,दीपशिखा जैन,दीपक,प्रभु राम आदि लोग उपस्थित रहे*

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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