जहां कीर्तन होता परमात्मा का निवास वही,
पुष्कर दास महाराज
अम्बे माता गुफा मंदिर में चल रही “नानी बाई का मायरा” कथा में दूसरे दिन उमड़े श्रद्धालु l
देसूरी,पाली
अम्बे माता गुफा मंदिर में पुष्कर दास जी महाराज के द्वारा “नानी बाई का मायरा” की कथा में दूसरे दिन कहा परमात्मा का निवास वही जहां भक्त भाव से भजन करते l अदृश्य रूप से भगवान वही बिराजमान होते हे l नरसी जी को परिवार वाले समझने वाले नहीं थे l अध्यात्म मार्ग में जब तक प्रतिकूल वातावरण नहीं मिलता तब तक व्यक्ति प्रभु शरण में नहीं जा सकता l नरसी जी के सामने कई समस्याएं थी फिर भी उन्होंने भजन को नहीं छोड़ा l भाभी ने नरसी जी को घर से बाहर निकाला दिया l घर से बाहर निकलने के बाद नरसी जी जूनागढ़ के शिव जी के मंदिर में पहुंचे और वहा जाकर शिवलिंग से लिपट कर बोले प्रभु में अब आपकी शरण में आया हु l नरसी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव खुश हुए और वर मांगने के लिए कहा परंतु नरसी जी बोले आपको जो पसंद हो वह मुझे दो l भगवान शिव को अपने इष्ट कृष्ण का रास बहुत पसंद हे और वो नरसी को गौलोक में ले गए l गौलोक में भगवान कृष्ण ने नरसी को एक तंबूरा,एक करताल प्रदान करी l नरसी जी को भाई भाभी भजन करने के लिए मना करते हे लेकिन उन्होंने भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा lनरसी जी ने पत्नी को खूब ज्ञान का उपदेश दिया l ओर पत्नी मानिकगौरी ने घर का काम करके भी भजन में सहयोग किया l नरसी जी की बेटी नानी बाई का विवाह नगर अंजार के बड़े करोड़ पति सेठ श्री रंग जी के मझले बेटे से करवाया जाता है l महाराज ने धर्मपत्नी की व्याख्या करते हुए कहा कि पति को धर्म की ओर प्रेरित करे वही धर्मपत्नी है l नरसी जी का एक बेटा था जिसका नाम सांवल दास था l कुछ समय बाद बेटा शादी योग्य हुआ l बेटे के लिए रिश्ता बड़ नगर से सेठ मदन मेहता के बेटी के यहा से जोशी जी लेकर आए l नरसी के परिवार का सारंगधर मेहता ने हंसी करवाने के लिए गरीब नरसी जी का बेटा बताया l जोशी जी ने चतुरंगनी बारात लेकर निमंत्रण दिया l चतुरंगनी बारात का मतलब हाथी,घोड़े,रथ ओर पैदल l नरसी जी के पास कोई संपदा नहीं थी नरसी जी कुछ भी लेकर नहीं गए बारात में पंरतु भगवान को भक्त की चिंता थी तो भगवान द्वारकाधीश खुद चतुरंगनी बारात लेकर बड़नगर पहुंचे और बेटे का विवाह करवाया l मायरा किसलिए भरा गया उसका महाराज ने सही अर्थ बताते हुए कहा गुजरात में 16 संस्कार में से एक संस्कार को सीमंत संस्कार कहा जाता हे l नानी बाई के 8 माह का गर्भ था उस उपलक्ष्य में बेटी के पीहर वाले को मायरा भरने के लिए नानी बाई के ससुराल वालों ने नरसी जी को नगर अंजार में आमंत्रित किया l विट्ठल वैष्णव ने बताया शुक्रवार को कथा में भगवान द्वारकाधीश रुक्मणि जी के साथ पधारेंगे ओर नानी बाई को चूंदड़ी ओढ़ाने की रस्म अदा करेंगे l
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





