सौंदर्यीकरण ‘सुपर मॉडल’ बन गया है अटल पार्क।

SHARE:

सौंदर्यीकरण ‘सुपर मॉडल’ बन गया है अटल पार्क।

अयोध्या।

अटल पार्क इन दिनों सौंदर्यीकरण की राजनीति का ‘सुपर मॉडल’ बन गया है। यहां सरकारी विभागों की कार्यशैली पर एक ही सवाल गूंज रहा है क्या सुंदरता बढ़ाने के नाम पर सरकारी धन की दोहरी धुलाई हो रही है?
बता दे कि साकेतपुरी कॉलोनी स्थित अटल पार्क का नगर निगम ने दस महीने पहले ही सुंदरीकरण कराया था। आरटीआई में निगम ने बताया कि इस काम पर ₹55 लाख 64 हजार खर्च हुए। पार्क के गेट पर लगा शिलापट गवाही देता है 25 दिसंबर 2024 को लोकार्पण हुआ। लेकिन अब वही पार्क अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) के हाथों में है, और वही ‘सुंदरीकरण’ फिर से शुरू हो गया है। एडीए ने जनवरी 2025 में उसी कॉलोनी के पार्कों के विकास का नया टेंडर जारी किया।
पहले वाला सुंदर नहीं था क्या?’
यह सवाल अब शहर में चर्चा का विषय है। प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता आलोक सिंह का कहना है कि हम निगम से कराए गए कार्यों को छोड़कर बाकी काम करवा रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि पार्क में पहले से पाथ-वे, सोलर ट्री, सजावटी लाइटें और लैंडस्केपिंग मौजूद हैं। यानी नया काम पुराने काम की रंगाई-पुताई जैसा लग रहा है।
बॉक्स
सपा के पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय ‘पवन पांडे’ ने नगर निगम में हुए खर्च को लेकर बड़ा आरोप लगाया अटल पार्क समेत 33 पार्कों में करोड़ों का घोटाला हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट में दो सौ करोड़ की अनियमितता दर्ज है।
बॉक्स
जवाब में महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा पूर्व मंत्री के आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। हमने विकास किया, जबकि उनके शासनकाल में अयोध्या विकास से वंचित रही।
महापौर का दावा है कि सभी आडिट आपत्तियों के जवाब तैयार हो चुके हैं और दो-तीन दिन में जनता के सामने रखे जाएंगे।
‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना’ के तहत 33 पार्कों में मल्टी फैसिलिटी स्पोर्ट्स पार्क बनाने का लक्ष्य था टेबल टेनिस, बैडमिंटन, क्रिकेट टर्फ, सेंसर बेस्ड स्मार्ट टॉयलेट और ब्रांडेड जिम की सुविधाएं देने का दावा किया गया था। संवाददाता की पड़ताल में एक भी ऐसा पार्क नहीं मिला जहाँ यह सुविधाएँ हों। कहीं सिर्फ झूले हैं, कहीं अधूरा जिम, और कहीं बोर्ड टेढ़ा पड़ा हुआ।
गौरतलब हो कि अटल पार्क अब अटल नहीं रहा यह पार्क अटल जी के नाम पर है, पर काम करने वालों की नीयत में अटलता नहीं दिखती।
जहाँ एक ओर नगर निगम ने सेवा ही पहचान का नारा दिया, वहीं दूसरी ओर विकास प्राधिकरण उसी पार्क में फिर से हाथ लगा रहा है। जनता अब पूछ रही है क्या यह सुंदरीकरण है या सरकारी धन का पुनः-चक्रण? स्वराज इंडिया आगे भी पूछेगा अटल पार्क से निकली फाइलें आखिर किन जेबों में पहुंच रही हैं?

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

Mo.9414526432

Leave a Comment