(सद्भावना के दीप)
हर आंगन में दीप जले,हर घर खुशियां छा जाए।अधियारा हर दिल के मन से।
सदा _सदा को मिट जाए।
पावन मिट्टी के प्यारे दीपक ,खुशियों का संदेश सुनाते।
छोटे , बड़े सभी दीप, हर घर जगमग कर जाते।
मां लक्ष्मी का स्वागत कर ,गणपति का हो सत्कार ।
निश्चल मन की पूजा से , घर _घर आए खुशियां अपार।
रंगोली से सजे द्वार घर ,फूलों की खुशबू भर जाय
प्रेम _उल्लास से महके जीवन , हम सब प्यार का दीप जलाए
नफरत ,द्वेष, अंधकार मिटे, भाई चारे का दीप जले ।
सद्भावना की इस रोशनी में , नवयुग का सूत्रपात करें
कुछ घर में अंधकार की छाया, कुछ घर में है उजियारा।
प्यारे दीपक सोच रहे है, अंधकार ढकने की माया।
उन दीपों को इंतजार है, सद्भावना का दिया जलाए।
राग, द्वेष से मुक्त भारत को , दिव्य जगत में प्रकाशवान बनाए।
डी. एम. पाण्डेय (पुस्तकालय।ध्यक्ष)
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर, यू. पी.
Author: Rainbow News Hindustan
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