ई-रिक्शा: स्वरोजगार की ओर बढ़ता कदम, बेरोजगारी के बीच उम्मीद की नई किरण
अयोध्या।
मानव सभ्यता के विकास में पहिए का योगदान किसी परिचय का मोहताज नहीं है। बदलते वक्त के साथ यह पहिया अब एक नए रूप में सामने आया है-ई-रिक्शा के रूप में। न केवल यह परिवहन का सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल साधन है, बल्कि युवाओं और श्रमिक वर्ग के लिए रोजगार का सशक्त विकल्प भी बनता जा रहा है।
बीते कुछ वर्षों में विशेषकर शहरी और उपशहरी क्षेत्रों में ई-रिक्शा की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। कोविड-19 महामारी के बाद जब पारंपरिक रोजगार संकट में थे, तब ई-रिक्शा एक व्यवहारिक समाधान बनकर उभरा।
श्रमिकों की बात करें तो कारखानों में काम करने वाले एक सामान्य मजदूर की औसत मासिक आय 15 से 20 हजार रुपये के बीच होती है, जिसमें से अधिकांश हिस्सा किराया, भोजन और अन्य जरूरी खर्चों में चला जाता है। इसके उलट यदि वही व्यक्ति ई-रिक्शा चलाता है तो न केवल वह समान आय अर्जित कर सकता है, बल्कि अपने परिवार के साथ रहते हुए मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी बनाए रख सकता है।
इसी वजह से अब न केवल मजदूर वर्ग, बल्कि शिक्षित युवा भी इसे एक सम्मानजनक विकल्प मानकर अपना रहे हैं। बेरोजगारी के इस दौर में जहां वर्षों की पढ़ाई के बाद भी सरकारी या निजी नौकरी की कोई गारंटी नहीं है, वहीं ई-रिक्शा स्वरोजगार की एक नई राह दिखा रहा है।
ई-रिक्शा चलाने के लिए न तो विशेष तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है और न ही भारी-भरकम निवेश की। यह अपेक्षाकृत सुरक्षित है और इसके संचालन में दुर्घटना की संभावना भी कम रहती है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक नहीं है।
आत्मनिर्भरता की राह पर संत तुलसीदास पी.जी. कॉलेज, कादीपुर (सुलतानपुर) के समाजशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर उमाशंकर गुप्ता कहते हैं, ई-रिक्शा केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि यह समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आत्मनिर्भरता की ओर एक मजबूत कदम है। यह ग्रामीण और शहरी दोनों परिवेश में रोजगार के नए अवसर सृजित कर रहा है।
परिवहन क्षेत्र में तेजी से उभरते इस विकल्प को यदि शासन स्तर से उचित सहयोग, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता मिले, तो यह लाखों लोगों के जीवन में स्थायित्व और सम्मानजनक आजीविका प्रदान कर सकता है।बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश में ई-रिक्शा न केवल एक वाहन है, बल्कि यह उम्मीद की वह गाड़ी है, जो युवाओं को बेरोजगारी से आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रही है।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





