कृपापात्र जगद्गुरु अर्जुनद्वाराचार्य कृपालु रामभूषणदेवाचार्य ने इन पंक्तियों के माध्यम से भावना व्यक्त की।

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दशरथमहल में पांच दिवसीय सत्संगमाला संयोजित है। इस अवसर पर बिदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि स्वामी रामप्रसादाचार्य की गहन आस्था के आगे आराध्य की मृण्मय मूर्तियां सजीव हो उठी थीं और ऐसा कर उन्होंने सिद्ध किया कि आस्था सच्ची हो, तो भगवान ही नहीं प्रकट होता गुरुता भी प्रतिष्ठित होती है। उनके कृपापात्र जगद्गुरु अर्जुनद्वाराचार्य कृपालु रामभूषणदेवाचार्य ने इन पंक्तियों के माध्यम से भावना व्यक्त की, लोग कहते हैं पत्थर पिघल नहीं सकता मैं बेकरार हूं आवाज में असर के लिए।

सद गुरु बधाई भवन पीठाधीश्वर महंत राजीव लोचन शरण ने कहा कि गुरु अनुपम शिल्पी है। गुरु मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं और जन्म-मृत्यु के चक्र से आत्मा को मुक्त करने में सहायक होते हैं। तीर्थकर तत्वतः गुरु

ही होते हैं और उनकी प्रेरणा से जन साधारण को मोक्ष का मार्ग मिलता है। इसीलिए गुरु को ऐसा होना चाहिए, जो मोक्षगामी हो और शिष्य को भी उस पद तक पहुंचाने की क्षमता रखता हो।

श्यामा सदन रामघाट के महंत श्रीधर दास जी ने कहा कि वह गुरु ही है, जिन्होंने गोविंद से पहचान कराई और इसी के अनुरूप अब गोविंद के गुणों का गान परम आनंद का सूत्र बन गया है।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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