इप्टा के स्थापना दिवस पर गोष्ठी आयोजित की गयी।

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इप्टा के स्थापना दिवस पर गोष्ठी आयोजित की गयी।

संजय यादव,अयोध्या।

भारतीय जन नाट्य संघ, अयोध्या इकाई ने इप्टा के निर्माण दिवस के अवसर पर साकेतपुरी में कॉमरेड अशोक तिवारी के आवास पर एक गोष्ठी का आयोजन किया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि स्वप्निल श्रीवास्तव और संचालन जिला सचिव डॉ. आर डी आनंद ने किया। इप्टा के संरक्षक मंडल के वरिष्ठ साथी डॉ. रघुवंशमणि ने बताया कि इप्टा का गठन 25 मई 1943 को बॉम्बे के मारवाड़ी स्कूल में आयोजित थिएटर कलाकारों के राष्ट्रीय सम्मेलन में किया गया था, जो थिएटर कलाकारों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बनने की आवश्यकता के जवाब में था। इसकी उत्पत्ति 1936 में आयोजित पहले प्रगतिशील लेखक संघ सम्मेलन, 1940 में कलकत्ता में युवा सांस्कृतिक संस्थान की स्थापना और 1941 में अनिल डिसिल्वा द्वारा बैंगलोर में पीपुल्स थिएटर की स्थापना में निहित है। इसके शुरुआती सदस्यों में विभिन्न प्रगतिशील सांस्कृतिक मंडलियां, थिएटर समूह और अन्य प्रगतिशील सांस्कृतिक कार्यकर्ता शामिल थे। पीपुल्स थिएटर नाम प्रसिद्ध वैज्ञानिक होमी जे. भाभा ने सुझाया था, जो बदले में रोमां रोलांड की पीपुल्स थिएटर की अवधारणाओं पर पुस्तक से प्रेरित थे। इसकी आरंभिक गतिविधियों में बंगाल सांस्कृतिक दल के बिनॉय रॉय द्वारा आयोजित नुक्कड़ नाटक शामिल थे, जिसका उद्देश्य लोगों को बंगाल में 1942 में आए मानव निर्मित अकाल के बारे में जानकारी देना था। उनके कार्यक्रमों में वामिक जौनपुरी द्वारा रचित ‘भूखा है बंगाल’ नामक गायन मंडली और अन्य गीत और नाटक शामिल थे। इस दल में संगीतकार प्रेम धवन, ड्रम वादक दशरथ लाल, गायिका रेवा रॉय और अभिनेत्री उषा दत्त शामिल थीं। इस दल से प्रेरित होकर आगरा सांस्कृतिक दल सहित कई अन्य सांस्कृतिक समूहों का गठन किया गया। बाद में इन स्थानीय समूहों को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित करने के लिए इप्टा का गठन किया गया।
वैचारिक रूप से ये समूह वामपंथी आंदोलन और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के तत्कालीन महासचिव पीसी जोशी और प्रगतिशील लेखक संघ के महासचिव सज्जाद ज़हीर से प्रेरित थे। समूह के कुछ शुरुआती सदस्यों में थे पृथ्वीराज कपूर, बिजोन भट्टाचार्य, बलराज साहनी, ऋत्विक घटक, उत्पल दत्त, ख्वाजा अहमद अब्बास, सलिल चौधरी, पंडित रविशंकर, ज्योतिरींद्र मोइत्रा, निरंजन सिंह मान, एस. तेरा सिंह चान, जगदीश फरयादी, खलीली फरयादी, राजेंद्र रघुवंशी, सफदर मीर, हसन प्रेमानी, अमिया बोस, सुधीन दासगुप्ता, अन्नाभाऊ साठे, शाहिर अमर शेख आदि। इस समूह का गठन 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में किया गया था, जिसमें एक ओर 1943 का बंगाल का अकाल और भारत में भूख से मौतें हुई थीं और दूसरी ओर भारत छोड़ो आंदोलन के मद्देनजर औपनिवेशिक आकाओं का दमन और दूसरी ओर सोवियत संघ पर फासीवादी शक्तियों का आक्रमण था। 1943 में मुंबई में अखिल भारतीय जन रंगमंच सम्मेलन आयोजित किया गया, जहाँ समूह ने रंगमंच के माध्यम से समय के संकट को दर्शाने और लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों को समझने में मदद करने के अपने विचार और उद्देश्य को प्रस्तुत किया। इस सम्मेलन ने पूरे भारत में इप्टा की समितियों का गठन किया। इस आंदोलन ने न केवल थिएटरों को प्रभावित किया बल्कि भारतीय भाषाओं में सिनेमा और संगीत को भी प्रभावित किया।
तत्पश्चात, काव्यपाठ आयोजित किया गया जिसमें वरिष्ठ कवि श्री स्वप्निल श्रीवास्तव, कॉमरेड अयोध्या प्रसाद तिवारी, कॉमरेड अशोक तिवारी, कॉमरेड सूर्यकांत पांडे, श्री श्याम नारायण पाण्डेय, श्री जशवंत अरोड़ा, कॉमरेड एस एन बागी, डॉ. मुकेश आनंद, डॉ. रघुवंशमणि, डॉ. आर डी आनंद, श्री आशाराम जागरथ, डॉ. विशाल श्रीवास्तव, श्री मोतीलाल तिवारी, डॉ. बृजेश यादव, कॉमरेड अतीक अहमद, कॉमरेड रामजी राम यादव, सुश्री मिंदिला चौधरी, सुश्री याशिका चौधरी, श्री अमरनाथ वर्मा, श्री रोशनलाल सोनकर, श्री कर्मराज गुप्ता एवं श्री ऋषि पाण्डेय इत्यादि ने कविता पाठ किया।
अंत में, कॉमरेड अशोक तिवारी ने सभी साथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया तथा अध्यक्ष श्री स्वप्निल श्रीवास्तव ने सभा को बर्खास्त कर दिया।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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