चितौडगढ,नरेन्द्र सेठिया
निकुंभ
वर्तमान समय में मानव को ईश्वर की भक्ति के कठिन पर चलने के लिए सबसे पहले अपनी आत्मा को पहचानना बहुत आवश्यक है।जब तक वह आत्म चिंतन के मार्ग पर चलकर आत्मा के नजदीक नहीं पहुंचेगा तब तक ईश्वर को प्राप्त करना बहुत कठिन है। यह विचार कस्बे के समता भवन में शासन दीपक निश्चल मुनि मसा ने श्रावकों को संबोधित करते हुए कहे। मुनिश्री ने बताया कि मानव चिंता तो करता है परंतु चिंतन नहीं करता। मानव मोह,माया और लालच के वशीभूत होकर हर समय चिंता से गिरा रहता है। जिस दिन चिंता से दूर रहकर वह संतों की बात मानते हुए चिंतन के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए भगवान की वाणी आत्मा की आवाज से सुनने का प्रयास करेगा उसी दिन उसे मानव जीवन का रहस्य समझ में आ जाएगा। जीवन में आत्म चिंतन ,आत्म दर्शन, आत्म विश्लेषण, आत्मानुभूति, आत्म भाव के साथ आत्मा को समझने का प्रयास ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है। जैन संघ अध्यक्ष महावीर कुमार मेहता ने बताया कि इस अवसर पर मंगलवाड़,मोरवन,मिन्नाणा,डूंगला,सती खेड़ा,आसावरा एवं भानूजा के श्रीसंघ के सदस्यों की उपस्थिति में 41 दिवस तपस्या करने वाले सनातन श्रावक नंदलाल सालवी का बहुमान किया गया। धर्म सभा में लक्ष्मी लाल दोषी मंगलवाड , महावीर कुमार जारोली एवं मनुलता जारोली मोरवन ने अपने विचार व्यक्त किए। प्रभावना श्रावक नंदलाल सालवी एवं विमल कुमार संदीप कुमार जारोली मोरवन की ओर से वितरित की गई। श्री राम सत्संग सेवा परिषद के अध्यक्ष प्रेम सिंह सिसोदिया , जैन संघ के मंत्री सुरेश कुमार सहलोत, समता युवा संघ के अध्यक्ष मनोज कुमार सहलोत, मंत्री प्रदीप जैन ने बाहर गांव के अतिथि श्रीसंघों के सदस्यों का आभार जताया।
Author: Rainbow News Hindustan
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