चितौडगढ नरेन्द्र सेठिया की रिपोर्ट
चितौडगढ जिले के बबराणा में मिनी हाईवे निर्माण में बड़ा घोटाला: पीडब्ल्यूडी अफ़सरों, जनप्रतिनिधियों और ठेकेदार के गठजोड़ पर उठे सवाल
एसडीएम और तहसीलदार के स्तर पर सुनवाई न होने पर पीड़ित पहुंचे कलेक्टर के पास, निष्पक्ष जांच व सीमांकन की मांग*
भूपालसागर। उपखण्ड क्षेत्र के बबराणा गांव में कांकरवा-भादसोड़ा मिनी हाईवे पर चल रहे सीसी सड़क निर्माण में सरकारी बजट के खुलेआम दुरुपयोग और बड़े स्तर पर धांधली का मामला गरमा गया है। आरोप है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और निर्माण एजेंसी की कथित साठगांठ के चलते स्वीकृत मापदंडों और सड़क के तय लेवल को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है।
निचले स्तर पर सुनवाई न होने से निराश बबराणा निवासी शिकायतकर्ता तिलक विजयवर्गीय ने अंततः जिला कलेक्टर डॉ. मंजू के समक्ष पेश होकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है।
-: अधिकारियों की चौखट नापी, पर मिली सिर्फ बेरुखी :-
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ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण में गुणवत्ताहीन सामग्री, गलत लेवलिंग और जल निकासी (ड्रेनेज) की अनदेखी को लेकर कई बार शिकायतें की गईं। पीड़ित पक्ष ने उपखण्ड अधिकारी (SDM), तहसीलदार और PWD के आला अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन जिम्मेदार अफ़सरों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। अधिकारियों की इस अनदेखी से स्पष्ट है कि प्रशासनिक शह पर ठेकेदार अपनी मनमानी चला रहा है।
-: जलभराव से मकानों के अस्तित्व पर संकट :-
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सड़क का लेवल सही न होने के कारण बारिश और नालियों का गंदा पानी सीधे ग्रामीणों के मकानों के सामने जमा हो रहा है। यह पानी भवनों की नींव में घुस रहा है, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है और मकानों के ढहने का खतरा पैदा हो गया है। शिकायतकर्ता तिलक विजयवर्गीय ने जिला कलेक्टर को दिए ज्ञापन में स्पष्ट किया कि मुख्य टेंडरधारक कंपनी ‘शारदा इंजीनियरिंग, डूंगरपुर’ और मौके पर काम कर रहे पेटी ठेकेदार बंशी माली द्वारा नियमों को ताक पर रखकर निजी लाभ के लिए निर्माण कराया जा रहा है।
-: सांठगांठ की जांच और सीमांकन की मांग :-
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कलेक्टर डॉ. मंजू को सौंपी गई शिकायत में मांग की गई है कि:
पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर मौके पर सड़क की स्वीकृत चौड़ाई, राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) और निजी भूमि का पारदर्शी सीमांकन कराया जाए।
जनप्रतिनिधियों, पीडब्ल्यूडी अफ़सरों और ठेकेदार के बीच कथित आर्थिक साठगांठ की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच हो।
गुणवत्ताहीन निर्माण कराने वाले ठेकेदार का लाइसेंस रद्द कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
यदि जिला प्रशासन ने इस भ्रष्टाचार पर जल्द कड़ा संज्ञान लेकर मौके पर काम नहीं रुकवाया और जांच शुरू नहीं की, तो पीड़ित ग्रामीण इस मामले को उच्च प्रशासनिक मंचों और न्यायालय के समक्ष ले जाने को मजबूर होंगे।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





