चितौडगढ नरेन्द्र सेठिया की रिपोर्ट
9 अगस्त की ‘अगस्त क्रांति’ को सरकारी कार्यक्रमों में उचित स्थान नहीं देना स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की उपेक्षा : कांग्रेस
कपासन/चित्तौड़गढ़। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव डॉ. ललित बोरीवाल, जिला कांग्रेस कमेटी चित्तौड़गढ़ के अध्यक्ष प्रमोद सिंह सिसोदिया, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं विचारक शिव शंकर उपाध्याय, संगठन महासचिव दिनेश चाष्टा एवं नगर कांग्रेस कमेटी कपासन के अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा एडवोकेट ने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में 9 से 17 अगस्त तक आयोजित किए जा रहे “हर घर तिरंगा अभियान” का कांग्रेस स्वागत करती है। तिरंगा प्रत्येक भारतीय के गौरव, स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है, लेकिन सरकार को यह भी बताना चाहिए कि जिस 9 अगस्त से अभियान प्रारंभ किया जा रहा है, उसी दिन के ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन एवं अगस्त क्रांति को सरकारी कार्यक्रम में अपेक्षित महत्व क्यों नहीं दिया गया।
डॉ. ललित बोरीवाल ने कहा कि 9 अगस्त 1942 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की निर्णायक तारीख है। महात्मा गांधी के “करो या मरो” के आह्वान पर देश के लाखों नागरिक अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध उठ खड़े हुए। हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने जेल, लाठियां और गोलियां सहकर आजादी की लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया। उन्होंने कहा, “9 अगस्त से हर घर तिरंगा अभियान शुरू हो और उसी 9 अगस्त की अगस्त क्रांति को पर्याप्त स्थान न मिले, तो सरकार की ऐतिहासिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।”
जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रमोद सिंह सिसोदिया ने कहा कि 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने पर किसी को आपत्ति नहीं है। विभाजन में जान गंवाने और विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले लाखों लोगों का सम्मानपूर्वक स्मरण होना चाहिए। लेकिन स्वतंत्रता सप्ताह में देश को आजाद कराने वाले आंदोलनों और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष को भी समान प्रमुखता मिलनी चाहिए। इतिहास के किसी एक अध्याय को प्रमुखता देकर स्वतंत्रता संग्राम के दूसरे महत्वपूर्ण अध्यायों को पीछे नहीं किया जा सकता।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं विचारक शिव शंकर उपाध्याय ने कहा कि राष्ट्र का इतिहास उसकी सामूहिक स्मृति होता है और उस स्मृति का संरक्षण सत्ता की सुविधा के अनुसार नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य और भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। 9 अगस्त की अगस्त क्रांति ने भारतीय जनमानस में पूर्ण स्वतंत्रता के संकल्प को जनांदोलन में परिवर्तित किया था। उन्होंने कहा, “विभाजन की पीड़ा को याद करना आवश्यक है, लेकिन उससे पहले उस संघर्ष को भी उतनी ही गंभीरता से याद करना होगा जिसने भारत को स्वतंत्रता के द्वार तक पहुंचाया। इतिहास के चयनात्मक स्मरण से नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन की संपूर्ण तस्वीर नहीं मिल सकती।”
संगठन महासचिव दिनेश चाष्टा ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन कोई सामान्य ऐतिहासिक घटना नहीं थी, बल्कि अंग्रेजी शासन के विरुद्ध भारतीय जनता की निर्णायक हुंकार थी। “हर घर तिरंगा पहुंचाने के साथ हर घर तक यह इतिहास भी पहुंचना चाहिए कि स्वतंत्र आकाश में तिरंगा फहराने का अधिकार लाखों भारतीयों के संघर्ष, त्याग और बलिदान से प्राप्त हुआ है।”
नगर कांग्रेस अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा एडवोकेट ने कहा कि विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों एवं नगर निकायों में 9 अगस्त को “अगस्त क्रांति दिवस” के रूप में व्यापक कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। विद्यार्थियों और युवाओं को महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन तथा ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान से परिचित कराना सरकार और समाज दोनों का दायित्व है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह प्रश्न किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता की विरासत और ऐतिहासिक स्मृति के सम्मान का है। महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद सहित असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की कि 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन एवं अगस्त क्रांति के स्मरण में राज्यभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा विद्यालयों, महाविद्यालयों, पंचायतों, नगर निकायों एवं जिला स्तर पर स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित संगोष्ठियां, प्रदर्शनियां और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हों।
“हर घर तिरंगा अवश्य फहरे, लेकिन हर मन में आजादी के संघर्ष और बलिदान का इतिहास भी जीवित रहे। 9 अगस्त की अगस्त क्रांति को भुलाकर स्वतंत्रता का उत्सव अधूरा है।”
Author: Rainbow News Hindustan
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