कलेक्ट्रेट परिसर में घुसा खतरनाक विषैला कोबरा,मचा हड़कंप।

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चित्तौडगढ से नरेन्द्र सेठिया की रिपोर्ट

कलेक्ट्रेट परिसर में घुसा खतरनाक विषैला कोबरा,मचा हड़कंप।

चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के मयूर गोसावी ने साहस और सूझबूझ से किया सुरक्षित रेस्क्यू, घायल नाग को दिया प्राथमिक उपचार

चित्तौड़गढ़, जिला कलेक्टर कार्यालय स्थित रजिस्ट्रार कार्यालय में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब कार्यालय परिसर में एक खतरनाक विषैला भारतीय कोबरा (नाग) दिखाई दिया। अचानक नाग के दिखाई देने से कार्यालय में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अपने कार्य से पहुंचे आमजन में हड़कंप मच गया। कुछ समय के लिए कार्यालय का कार्य भी प्रभावित हो गया और लोग भयवश सुरक्षित स्थानों की ओर हट गए।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल इसकी सूचना चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति को दी गई। सूचना मिलते ही समिति के प्रशिक्षित वन्यजीव रेस्क्यू सदस्य मयूर गोसावी बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया तथा उपस्थित लोगों को शांत रहने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की समझाइश दी क्यों कि सांप घायल अवस्था में होने के कारण काफी आक्रामक हो गया था।

इसके बाद मयूर गोसावी ने अत्यंत धैर्य, अनुभव एवं वैज्ञानिक तरीके से विषैले कोबरा का सफल एवं रोमांचक रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के दौरान बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर एकत्र हो गए और पूरे घटनाक्रम को उत्सुकता से देखते रहे। कुछ ही देर में नाग को सुरक्षित पकड़ लिया गया, जिससे कार्यालय परिसर में मौजूद सभी लोगों ने राहत की सांस ली। समिति की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के कारण किसी भी प्रकार की जनहानि अथवा अप्रिय घटना नहीं हुई।

रेस्क्यू के दौरान निरीक्षण करने पर पाया गया कि कोबरा घायल अवस्था में था। उसके शरीर पर कई स्थानों पर चोट के निशान दिखाई दिए। समिति के सदस्यों के अनुसार, प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि नाग संभवतः किसी नेवले या कुत्तों के साथ संघर्ष के दौरान घायल हुआ होगा। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती। रेस्क्यू के तुरंत बाद समिति द्वारा नाग को वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. धर्मेंद्र सोन के पास ले जाया गया और आवश्यक प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया, जिससे उसकी स्थिति में सुधार हो सके। अब उसकी निगरानी की जाएगी तथा पूर्णतः स्वस्थ होने के बाद वन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार उसे उसके प्राकृतिक एवं सुरक्षित वन्य आवास में छोड़ा जाएगा।

समिति ने बताया कि भारतीय कोबरा अत्यंत विषैला सर्प है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में यह बिना कारण मनुष्यों पर हमला नहीं करता। अधिकांश मामलों में सांप स्वयं को असुरक्षित महसूस होने या छेड़छाड़ किए जाने पर ही बचाव की प्रतिक्रिया देता है। इसलिए सांप दिखाई देने पर घबराने या उसे मारने का प्रयास करने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम अथवा वन विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित एवं जिम्मेदार कदम है।

चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष मनीष तिवारी ने आमजन से अपील की है कि वर्षा ऋतु के दौरान सांप एवं अन्य वन्यजीव अक्सर भोजन और सुरक्षित आश्रय की तलाश में मानव बस्तियों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे समय में धैर्य एवं जागरूकता का परिचय देना आवश्यक है। वन्यजीवों की हत्या करना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण संबंधी कानूनों के अंतर्गत दंडनीय भी हो सकता है।

तिवारी ने यह भी कहा कि सांप प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे खेतों, गोदामों और आबादी वाले क्षेत्रों में चूहों जैसे हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित कर किसानों की फसलों की रक्षा करते हैं तथा पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखते हैं। इसलिए सांपों के प्रति अंधविश्वास या भय के बजाय संरक्षण और सह-अस्तित्व की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है।

समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि आमजन का सहयोग और जागरूकता ही वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बना सकती है। चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति भविष्य में भी वन्यजीवों के सुरक्षित रेस्क्यू, संरक्षण एवं जनजागरूकता के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

Mo.9414526432

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