फर्जी विकलांगता प्रमाणपत्र मामले में फंस सकते हैं पूर्व प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
डिप्टी कमिश्नर जीएसटी प्रशांत कुमार सिंह को नौकरी दिलाने के लिए जारी किया गया था दिव्यांगता प्रमाणपत्र
अयोध्या। भ्रष्टाचार से जुड़े विवादों में घिरे रहे जिला अस्पताल अयोध्या के पूर्व प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृज कुमार का एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने मऊ जनपद में नौकरी पाने की चाहत रखने वाले एक युवक के लिए फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया था। शासन स्तर पर इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है, जिसमें डॉ. बृज कुमार की भूमिका संदेह के घेरे में है।बताया जाता है कि राज्यकर विभाग अयोध्या में तैनात डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) प्रशांत कुमार सिंह को नौकरी दिलाने के उद्देश्य से यह प्रमाणपत्र बनवाया गया था। प्रशांत कुमार सिंह हाल ही में उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने योगी आदित्यनाथ पर की गई एक टिप्पणी से स्वयं को आहत बताते हुए नाटकीय अंदाज में इस्तीफा दिया था और चार दिन बाद पुनः सेवा ज्वाइन कर ली थी। इस घटनाक्रम को लेकर प्रदेशभर में व्यापक चर्चा हुई थी।जानकारी के अनुसार 27 अक्टूबर 2009 को सीएमओ कार्यालय मऊ से जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र पर तत्कालीन नोडल अधिकारी के रूप में डॉ. बृज कुमार के हस्ताक्षर हैं। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर प्रशांत कुमार सिंह को राज्यकर विभाग में नियुक्ति मिली। इस प्रमाणपत्र को प्रशांत कुमार सिंह के भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने चुनौती दी है, जिसके बाद शासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रशांत कुमार सिंह को चार बार तलब किया जा चुका है, किंतु वह अब तक बोर्ड के समक्ष उपस्थित नहीं हुए हैं।
क्यों संदेह के घेरे में है दिव्यांगता प्रमाणपत्र
वर्ष 2009 में जारी प्रमाणपत्र में प्रशांत कुमार सिंह को नेत्र रोग मैक्यूलर डिजेनरेशन से पीड़ित बताया गया है। सामान्यतः यह बीमारी 50 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में पाई जाती है। प्रमाणपत्र में तत्कालीन नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई.पी. गुप्ता द्वारा
मैक्यूलर डिजेनरेशन लेफ्ट आई एंड लॉस ऑफ विजन राइट आई अंकित करते हुए 40 प्रतिशत दिव्यांग घोषित किया गया है।चौंकाने वाली बात यह है कि प्रमाणपत्र जारी होने के समय प्रशांत कुमार सिंह की आयु मात्र 31 वर्ष थी। साथ ही प्रमाणपत्र पर अन्य दो चिकित्सकों के हस्ताक्षर नहीं हैं। यहां तक कि सीएमओ के हस्ताक्षर वाले स्थान पर भी डॉ. बृज कुमार के ही हस्ताक्षर पाए गए हैं।इन तथ्यों के सामने आने के बाद पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। यदि शासन स्तर पर चल रही जांच निष्पक्ष रूप से पूरी होती है, तो फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में पूर्व प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बृज कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





