चितौडगढ नरेन्द्र सेठिया
आस्था का महाकुंभ: श्री करेड़ा पार्श्वनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव कल से
भूपालसागर में ‘संकटमोचक प्रभु’ के जन्मोत्सव की भव्य तैयारियां पूर्ण; 14 से 16 दिसंबर तक उमड़ेगा लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब
भूपालसागर। धर्म, भक्ति और आध्यात्म का विराट केंद्र, श्री 108 करेड़ा पार्श्वनाथ महातीर्थ, भूपालसागर, एक बार फिर आस्था के सागर में गोता लगाने के लिए तैयार है। जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर, जिन्हें संकटमोचक भगवान श्री पार्श्वनाथ के नाम से जाना जाता है, उनके जन्म कल्याणक महोत्सव को समर्पित तीन दिवसीय भव्य मेले और महोत्सव का शुभारंभ कल, 14 दिसंबर 2025, रविवार से होने जा रहा है। कल 14 दिसंबर, रविवार को आयोजित जन्मोत्सव के पावन अवसर पर, प्रातः 10:30 बजे भगवान का भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा, जो भक्तिमय माहौल को और अधिक दिव्य बनाएगा। इसके उपरांत, दोपहर 12:30 बजे विशाल स्वामीवात्सल्य (सामूहिक भोजन) का आयोजन किया गया है। इस भव्य आयोजन के लिए तीर्थ कमेटी ने इस महाआयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अनुमान है कि देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु भूपालसागर पहुँचेंगे। यह महोत्सव 16 दिसंबर, मंगलवार तक चलेगा, जिसमें भक्ति और आराधना का अदभुत समागम देखने को मिलेगा।
-: मुख्य आकर्षण: भगवान का जन्म कल्याणक और अष्टम तप आराधना :-
महोत्सव का केंद्रीय आकर्षण 14 दिसंबर 2025 (वदी दशम्) को मनाया जाने वाला भगवान श्री पार्श्वनाथजी का जन्म कल्याणक महोत्सव होगा। इस दिन भव्य महापूजा, रुद्राभिषेक पूजा, और विशेष अष्टम तप आराधना का आयोजन किया जाएगा। यह 2300 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक तीर्थ विशेष रूप से इसी अष्टम तप आराधना के लिए प्रसिद्ध है, जो हर वर्ष हजारों तपस्वियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। इसके बाद, 15 दिसंबर को प्रक्षालन कला और पूजा विधि पर धार्मिक प्रतियोगिताएँ होंगी, जबकि 16 दिसंबर को पार्श्वनाथ महोत्सव एवं समापन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
-: लाखों श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता व्यवस्था और इंतज़ाम :-
लाखों की संभावित भीड़ को देखते हुए, तीर्थ कमेटी ने व्यापक और पुख्ता इंतजाम किए हैं। भक्तों की सुविधा के लिए मणिधारी जिनालय के सुगम दर्शनों की व्यवस्था की गई है, साथ ही एक विस्तृत भोजनशाला भी तैयार की जा रही है। सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और आपातकालीन सेवाओं के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त, मेला ग्राउंड में दुकानें, झूले और हॉकर आदि के लिए प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया मेले से पूर्व ही शुरू हो गई थी, जिसमें देशभर के दुकानदारों में खासा उत्साह देखने को मिला, जिससे मेले की भव्यता और विविधता सुनिश्चित होगी।
-: इतिहास बना आस्था: तीर्थ में अब 108 पार्श्वनाथ भगवान बिराजमान :-
इस वर्ष का जन्म कल्याणक महोत्सव एक ऐतिहासिक कारण से और भी विशेष है। तीर्थ कमेटी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस महातीर्थ में पहले 108 पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमाएं बिराजमान नहीं थीं। इसी वर्ष फरवरी माह में 108 पार्श्वनाथ भगवान की 50 से अधिक प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा का भव्य समारोह संपन्न हुआ। अब यह तीर्थ 108 पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमाओं से सुशोभित है, जिससे श्रद्धालुओं को यहाँ एक साथ इन सभी रूपों के दर्शन, वंदन और पूजन का लाभ मिल रहा है।
-: आज से शुरू हुई अठम तप आराधना :-
तीन दिवसीय महोत्सव के औपचारिक शुभारंभ से एक दिन पूर्व, यानी आज (13 दिसंबर, शनिवार) से ही तीर्थ पर अठम तप आराधना शुरू हो गई है। यह तपस्या हर वर्ष हजारों तपस्वियों को आकर्षित करती है, और इस वर्ष भी बड़ी संख्या में आराधकों ने अपनी तपस्या प्रारंभ कर दी है, जिससे परिसर में धार्मिक ऊर्जा का संचार बढ़ गया है।
-: श्री करेड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ: मेवाड़ का ‘बावन जिनालय’ और उसकी अनूठी प्राचीनता :-
श्री करेड़ा पार्श्वनाथ मन्दिर, राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले में भूपालसागर गाँव में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और पूजनीय श्वेताम्बर जैन तीर्थ है, जो जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित है। इस दिव्य मन्दिर में लगभग 31 इंच ऊँची, श्याम वर्ण की, पद्मासनस्थ प्रतिमा स्थापित है, जिसका निर्माण विक्रमी संवत 1656 (1599 ई.) में बताया जाता है। हालाँकि, इसकी प्राचीनता का अनुमान वर्तमान जीर्णोद्धार के समय प्राप्त एक प्राचीन स्तंभ से लगाया जाता है, जिस पर ‘सं. 55’ का लेख उत्कीर्ण है, जो इसे विक्रम से पूर्व काल का तीर्थ होने का संकेत देता है। इस तीर्थ का इतिहास विक्रमी संवत 861 (804 ई.) में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है, जब श्री खीमसिंह शाह ने एक शानदार और विशाल मंदिर का निर्माण कराया तथा आचार्य श्री जयानंदसूरिश्वरजी ने मूर्ति की प्रतिष्ठा की थी। यह तीर्थ विशेष रूप से ‘बावन जिनालय’ के नाम से विख्यात है, क्योंकि यह मुख्य मंदिर 52 छोटे मंदिरों (जिनालयों) से घिरा हुआ है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसके पूर्ण दर्शन से 52 अन्य तीर्थों के दर्शन का लाभ प्राप्त होता है। अपनी वास्तुकला, प्राचीनता और धार्मिक महत्व के कारण यह मन्दिर मेवाड़ (राजस्थान) के प्रमुख धार्मिक स्थलों के समान ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
-: कल सूर्य अपनी पहली किरण से भगवान पार्श्वनाथ का करेंगे अभिनन्दन :-
श्री करेड़ा पार्श्वनाथ मंदिर, भूपालसागर से जुड़ी एक दिव्य और अलौकिक मान्यता है कि पौष माह की दशम तिथि, जो भगवान पार्श्वनाथ के जन्म कल्याण महोत्सव का पावन दिवस है, उस दिन सूर्य की पहली सुनहरी किरण सीधे उनकी प्रतिमा का अभिषेक करती है। श्रद्धालु इस अद्वितीय खगोलीय घटना को मात्र संयोग नहीं, बल्कि मंदिर के प्राचीन इतिहास और असाधारण वास्तुशिल्प की गहराई में निहित कोई दिव्य संकेत या चमत्कार मानते हैं। कुछ लोग इसे प्राचीन कारीगरों की इंजीनियरिंग का चमत्कार मानते हैं, जिनका अनुमान है कि मंदिर की दिशा, खिड़कियों और दरवाजों की सटीक ज्यामितीय स्थिति को विशेष रूप से इस तरह से डिज़ाइन किया गया होगा कि यह अद्भुत प्रकाश-संयोग पौष शुक्ल दशमी के सूर्योदय पर ही घटित हो सके। वहीं, पौराणिक कथाओं में यह बताया गया है कि किसी महान संत या देवता ने यह संकेत दिया था कि इस विशेष तिथि पर सूर्य की प्रथम रश्मि प्रतिमा को स्पर्श करेगी, जो मंदिर की अत्यंत पवित्रता और आध्यात्मिक महत्व को सिद्ध करती है, और यह वार्षिक घटना आस्था तथा स्थापत्य कला के अद्भुत संगम को दर्शाती है।
-: कानून-व्यवस्था चाक-चौबंद: पुलिस लाइन से अतिरिक्त जाप्ता तैनात :-
लाखों की भीड़ को देखते हुए, स्थानीय थानाधिकारी लादूलाल सोलंकी ने मेले में पुख्ता कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए चित्तौड़गढ़ पुलिस लाइन से भी अतिरिक्त पुलिस जाप्ता (बल) मंगवाया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से चिकित्सा सुविधा और आपातकालीन सेवाओं के साथ-साथ, मणिधारी जिनालय और मेला ग्राउंड में हर कोने पर पुलिस बल तैनात रहेगा ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और यह तीन दिवसीय धार्मिक समागम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





