*खजुरी ताल की रामलीला मर्यादा के अनुशासन पर आधारित-महंत संजय दास*
*जगद्गुरु रामानुजाचार्य का तंज फिल्मी कलाकार आहत कर रहे धार्मिक भावनाएं*
*20 सितंबर से होगा खजुरी ताल की ऐतिहासिक रामलीला का भव्य शुभारंभ*
अयोध्या।
संत श्री तुलसीदास रामलीला समिति द्वारा रविवार को बड़ा भक्त महल परिसर में आयोजित प्रेसवार्ता में समिति प्रमुख जनमेजय शरण ने कहा कि श्रीराम की लीलाएं केवल मंचन नहीं, बल्कि श्रद्धा और मर्यादा का जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि खजुरी ताल की ऐतिहासिक रामलीला इस वर्ष भी विशेष रूप से मंचित की जाएगी, जिसमें स्थानीय कलाकारों के साथ धर्म के जानकार विद्वानों का मार्गदर्शन रहेगा।
प्रेसवार्ता में महामंत्री संजय दास ने कहा कि खजुरी ताल की रामलीला का भव्य आयोजन 20 सितंबर से प्रारंभ होगा। हमारी लीला मर्यादा और अनुशासन के अनुरूप होती है, जबकि फिल्मी कलाकारों द्वारा मंचित रामलीलाओं में न भाषा की शुद्धता होती है, न चरित्र की गहराई। वे केवल सरकारी बजट का दुरुपयोग करते हैं। जगद्गुरु रामानुजाचार्य ने फिल्मी कलाकारों पर तंज कसते हुए कहा कि “गांव-गांव में रामलीला का मंचन हमारी परंपरा रही है। लेकिन फिल्मी दुनिया के लोग जब धर्म के क्षेत्र में आते हैं तो वे मर्यादा की सीमाओं को नहीं समझ पाते और धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं।
महंत अवधेश दास ने कहा कि अयोध्या में कुछ रामलीलाओं में न साहित्य है, न संस्कृति। सरकार का बजट खर्च तो होता है, लेकिन नतीजा केवल दिखावा बनकर रह जाता है। इस अवसर पर हेमंत दास महाराज और धनुषधारी शुक्ला भी मौजूद रहे।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





