अयोध्या के कंचन भवन में संत परंपरा और धार्मिक अखंडता के गूंजे स्वर।

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कंचन भवन में आध्यात्मिक मिलन
पीठाधीश्वर महंत विजय दास से धनंजय महाराज की शिष्टाचार भेंट

अयोध्या के कंचन भवन में संत परंपरा और धार्मिक अखंडता के गूंजे स्वर

अयोध्या धाम । रामनगरी का आध्यात्मिक और ऐतिहासिक धरोहर स्थल कंचन भवन रविवार को एक विशेष अवसर का साक्षी बना। कंचन भवन के पीठाधीश्वर महंत विजय दास जी महाराज से विख्यात संत धनंजय महाराज ने शिष्टाचार भेंट की। इस भेंट के दौरान भवन का वातावरण संतों के संवाद से आलोकित हो उठा।आध्यात्मिक चर्चा से महका वातावरण दोनों संतों के बीच हुई मुलाक़ात सामान्य औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें आध्यात्मिकता और धर्म के गहन विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। वार्ता में समाज में भक्ति और सदाचार की आवश्यकता, सनातन संस्कृति की निरंतरता और संत समाज की भूमिका जैसे बिंदुओं पर विशेष चर्चा हुई। महंत विजय दास जी ने इस अवसर पर कहा संत समाज के आपसी संवाद से भक्ति-पथ मजबूत होता है। धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए संतों का मिलन एक नई ऊर्जा प्रदान करता है।
धनंजय महाराज ने भी कंचन भवन की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कंचन भवन केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि यह स्थान भक्ति, धर्म और आध्यात्मिकता का जीवंत प्रतीक है। यहां आने से मन स्वतः श्रीराम-सियाजी की भक्ति में रम जाता है l कंचन भवन का ऐतिहासिक महत्व कंचन भवन अयोध्या की उन धार्मिक धरोहरों में से है, जिसका सीधा संबंध प्रभु श्रीराम और माता सीता से जुड़ा है। मान्यता है कि यह भवन माता कैकेयी द्वारा श्रीराम और सीता जी को उपहारस्वरूप प्रदान किया गया था। इसके कण-कण में रामभक्ति की आभा आज भी महसूस की जा सकती है। यही कारण है कि जब भी संत समाज यहां एकत्रित होता है, वातावरण भक्ति और अध्यात्म से ओतप्रोत हो उठता है। श्रद्धालुओं में उत्साह संतों की इस भेंट को देखने के लिए मौजूद श्रद्धालु गद्गद हो उठे। भक्तों ने कहा कि महंत विजय दास जी और धनंजय महाराज जैसे संतों का संवाद समाज को नई दिशा देने वाला है। कंचन भवन में गूंजे भक्ति और धर्म के स्वर ने श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभव प्रदान किया।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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