जागरूकता से ही हो सकता बचाव : डा अरविन्द मिश्रा
देव इंद्रावती महाविद्यालय कटहरी अम्बेडकर नगर में उप्र सरकार के निर्देशानुसार दिनांक 26//8/2025 को फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अन्तर्गत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटहरी से आय डा अरविन्द कुमार मिश्रा का स्वागत व्यक्तित्व विकास कैसे हो पुस्तक भेंट कर राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ अमित पांडेय द्वारा पुस्तक भेंट कर किया गया। डॉ अरविन्द कुमार मिश्रा ने कहा फाइलेरिया रोग परजीवी कृमियों के कारण होते हैं जो रक्त-चूसने वाले कीड़ों के काटने से फैलते हैं । रोगों के इस दुर्बल करने वाले समूह में रिवर ब्लाइंडनेस और लिम्फैटिक फाइलेरिया (जिसे आमतौर पर एलिफेंटियासिस के नाम से जाना जाता है) शामिल हैं।
नदी अंधता ओन्कोसेरसियासिस, जिसे आमतौर पर रिवर ब्लाइंडनेस के नाम से जाना जाता है, एक फाइलेरिया रोग है जो परजीवी निमेटोड कृमि ओन्कोसेरका वॉल्वुलस के कारण होता है। लोग रक्त-चूसने वाली काली मक्खियों के काटने से फैलने वाले कृमियों से संक्रमित होते हैं, जो तेज़ बहने वाली नदियों में प्रजनन करती हैं। कार्यक्रम अधिकारी डा तेज भान मिश्र ने कहा नदी अंधता आमतौर पर घातक नहीं होती, लेकिन यह लाखों लोगों को कष्ट और पीड़ा पहुँचाती है। मानव शरीर में , वयस्क कृमि भ्रूणीय लार्वा ( माइक्रोफाइलेरिया) उत्पन्न करते हैं जो त्वचा, आँखों और अन्य अंगों में फैल जाते हैं। ये कृमि गंभीर खुजली, त्वचा की विकृति, और अंधापन या दृष्टि क्षीणता का कारण बन सकते हैं।
डा बीरबल शर्मा ने कहा कुछ क्षेत्रों में रिवर ब्लाइंडनेस को खत्म करने के प्रयासों में लोआसिस या ‘अफ्रीकन आई वर्म’ नामक एक अन्य परजीवी संक्रमण के कारण बाधा आ रही है । जिन व्यक्तियों के रक्त में लोआ लोआ लार्वा (माइक्रोफाइलेरिया) की मात्रा बहुत अधिक होती है, उन्हें रिवर ब्लाइंडनेस की दवा, आइवरमेक्टिन, लेने पर जानलेवा जटिलताओं का खतरा होता है। इस अवसर पर विनय तिवारी, राजेंद्र सिंह,विजय शंकर, डा शिल्पी, सुधीर पांडेय आदि उपस्थित रहे।
Author: Rainbow News Hindustan
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