संजय यादव,अयोध्या
रामकोट स्थित श्री राम लला सदन देवस्थान में जगतगुरु स्वामी राघवाचार्य की कथा को सुन भाव विभोर हुए लेकिन भगवान के मुख में संपूर्ण सृष्टि दिख रही थी और भगवान के मुख में यह भी दिख रहा था गोकुल और गोकुल में यशोदा रानी और यशोदा रानी के सामने कृष्ण और कृष्ण के मुख में यशोदा देख रही हैं और उसे मुख में भी संपूर्ण ब्रह्मांड दिख रहा है कृष्ण लीला भगवान ने जब दिखाई तो यशोदा रानी तो व्याकुल हो गई यशोधारानी काटने लगे और उन्होंने अपनी आंखों को बंद कर दिया अपनी आंखों को बंद कर लिया और यशोदा रानी विश्व में भगवान ने देखा यह लीला तो देख कर मेरी मैया यशोदा पागल हो जाएगी यशोदा रानी ने भगवान श्याम सुंदर ने तुरंत उसे लीला को समेट लिया बोलो श्री सीताराम चंद्र भगवान चिंता मत करो आज गोवर्धन पूजा है विराट का दर्शन कराया यह लीला कृष्ण अवतार में दो बार हुआ
इसका नाम कृष्णा होगा और इसका एक नाम वासुदेव होगा नंद बाबा ने कहा वासुदेव नाम क्यों होगा नंद बाबा को थोड़ा खटक लगी क्या खटक बोले वासुदेव उसे कहते हैं नंद बाबा ने का बेटा तो हमारा है नाम वासुदेव कैसे होगा यह आपका जो बालक है प्रगायम वासुदेव यह तुम्हारा बालक पहले कभी वासुदेव जी का बेटा बना था इस रहस्य को जानने वाले लोग इसको वासुदेव कहेंगे पहले क्या अभी वासुदेव जी का ही बेटा लेकिन घूम करके कहा की प्रगायम वासुदेव वासुदेव श्रीमान अभिज्ञा संप्रथम जो इस रहस्य को जानते हैं वे लोग इसको वासुदेव करें अब देखो यहां एक बात है वासुदेव का जो पुत्र हो उसको वासुदेव कहते हैं यह भी अर्थ है लेकिन वासुदेव का विशेष अर्थ यह है कि जो कान-कान में बात करता है उसको कहते हैं वासुदेव यह प्रधान अर्थ है और यह अर्थ अनिका से सतयुग में स्वयंभू मनु और शतरूपा ने नैमिषारण्य में जाकर के जब 23000 वर्षों तक दवाद साक्षर मंत्र का जाप किया ओम नमो भगवते वासुदेवाय द्वादश अक्षर मंत्र सहित अनुराग वासुदेव पदपंग करूं दंपति सतयुग में भगवान वासुदेव के नाम का जाप किया भगत वचन प्रभु कृपा जो विश्व में बात करते हैं बात करते हैं उनका नाम वासुदेव है आपका जो छोर है ना इसके बहुत नाम कितने नाम है आपके पुत्र के बहुत नाम है जिस नाम से पुकारो भगवान इस नाम से सुन लेते हैं कितने नाम है उसे भक्त ने पूछा यह कौन से भगवान है गुरु जी ने कहा यह सिलसिले भगवान है नाम रख दिया भगवान को लेकर के मेरे भगवान को नहलाती बुलाती सेवा करती भोग लगती बड़ी लंबी कथा है वह दोनों दोनों को दिया ठाकुर जी और दोनों की दोनों बहने सेवा करती बिहार में जब वह अपने ससुराल जाने लगी तो अपने भगवान को ले जा रही थी तब तक उसके पति को लगा कि यहदिनभर भगवान वो रोने लगी मेरे भगवान को भेज दिया डांट दिया भक्त वही जो भगवान को भोग लगा करके प्रसाद पे सुंदर वस्तु खाने के लिए आपके समझ आए तो सुंदर स्वादिष्ट वस्तु को देखकर भगवान की याद आ जाए कि मैं अपने भगवान को भोग लगाऊं तो समझ लेना तुम्हारी वैष्णो माता पक्की हो गई और सामने मालपुआ रसगुल्ला आया भगवान की याद नहीं आई और खाने लगे इसका मतलब नहीं हुए पूरे पक्के जैसे मन को कोई वस्तु खाने को मिलती है तो मन सोचती है पहले मैं अपने छोरे को अपने बेटे की
याद आती है और भगवान
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





