ब्रह्माजी का गुरु आश्रम,महर्षी लोमश व नागा सन्यासियों की तपो भूमी रहा लोहागढ़ महादेव।

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श्रावण का दूसरा सोमवार पर विशेष:-
ब्रह्माजी का गुरु आश्रम,महर्षी लोमश व नागा सन्यासियों की तपो भूमी रहा लोहागढ़ महादेव
महेंद्र मेवाडा
देसूरी,पाली
देसूरी रेंज के सुमेर वन क्षेत्र में स्थित लोहागढ़ महादेव मंदिर इस क्षेत्र का सबसे प्राचीन व स्वयं ब्रह्माजी का गुरु आश्रम सहित कई ऋषि  व नागा सन्यासियों की तपो स्थली रहा।
भारत का सबसे प्राचीन व लोकप्रिय अजमेर के ब्रह्मा जी मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा के यज्ञ में महर्षि लोनश ऋषि आचार्य व ब्रह्माजी स्वयं यजमान थे। महर्षि लोनश आचार्य का आश्रम तपोभुमी स्थल होने के कारण इसे कालांतर में ब्रह्माजी के गुरु आश्रम से पहचाना जाता रहा। बाद में यहां नागा सन्यासियों का सबसे बड़ा आश्रम बन गया।
*मन्दिर की मुख्य विशेषता*
नागा सन्यासियों ने यहां पर बने शिवलिंग पर भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। मन्दिर के पीछे भव्य व विशाल कुंड बनवाया। जिसके तीनों और सीढ़िया व गोरक्ष बने हुए है। इस विशाल कुंड में सोनाणा के सफेद पत्थर व कोठारवड़ा के पत्थरों का उपयोग किया है। इस मंदिर के गर्भगृह में नो गृह स्थपित है जो जो विश्व के किसी भी शिव मंदिर में नही है। कालांतर में  इस क्षेत्र में भारी संख्या में नागा सन्यासी रहते थे। उनके पास सेकड़ो हाथी व घोड़े भी थे। इस क्षेत्र में आज भी खुदाई के दौरान पुराने मकानों के अवशेष व मन्दिर के आसपास से खुदाई में पन्द्रवीं व सोलहवीं शताब्दी की भगवान विष्णु,राम दरबार,जाम्बवंत हनुमान सहित कई देवी देवताओं खण्डित प्रतिमा निकली जो आज भी यहा विद्यमान है। साथ मुगल आक्रमणकारियो से लोहा लेते कई नागा सन्यासी शहीद हो गये थे। उनकी समाधियों पर लगी प्रतिमाओं मेसे कुछ को आज भी यहा स्थपित कर इतिहास को जीवित रखने की कोशिश की गई है। अब इस आश्रम के महंत रणछोड़ गिरी महाराज यहा की व्यवस्था सम्भाल रहे है। उनका कहना है कि इस तपो स्थली का इतिहास जीवित रखने के लिये हर सम्भव प्रयास किये जा रहे है। यहां पर कई लोग मन्दिर का जीर्णोद्वार व अन्य नव निर्माण के लिए कई लोग आ रहे है लेकिन उन्हें इस तपो स्थली के प्रमाण, इतिहास व पहचाने के चिन्हों को हटाने व मिटाने की इजाजत नही दी जा सकती। यह स्थल मारवाड़,गोडवाड़ व मेवाड़ की सीमा क्षेत्र में होने से यहा पर प्रतिदिन बाबा के भक्त पहुँचते है। महाशिव रात्री व श्रावण मास के पूरे महीना मेला लगा रहता है। अब मन्दिर तक सड़क होने यात्रियों को भी आने जाने की व मन्दिर की चार दिवारी में ही धर्मशाला रसोई घर इत्यादि का निर्माण होने से यात्रियों व दर्शनार्थियों सुविधा शुलभ करवाई जा रही है।
Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

Mo.9414526432

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