मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवा देने के लिए की गई छह करोड़ की खरीद पर उठ रहे सवाल
खरीदे गए कुछ उपकरण गोदाम व अलमारियों में रखे खराब हो रहे
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संजय यादव,अयोध्या।
जिला चिकित्सालय में वर्ष 2023 में अस्पताल को उच्चीकृत करने व मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए 60967442 रुपये के बजट से जो उपकरण खरीदे गए थे। उनमें से तमाम उपकरण अस्पताल के गोदामों या विभिन्न वार्डों में पड़े खराब हो रहे हैं। उनका प्रयोग मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने में नहीं किया जा रहा है। चौकाने वाली बात तो यह कि अस्पताल प्रशासन ने कर्मचारियों को नए खरीदे गए उपकरणों का प्रयोग करने के लिए कोई प्रशिक्षण भी नहीं दिलाया। यही नहीं ऐसे भी उपकरण खरीद लिए गए जिनका जिला अस्पताल में कोई उपयोग ही नहीं। अस्पताल प्रशासन की ओर से की गई मनमानी खरीद पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। आखिर खरीदे गए सामानों का उपयोग में नहीं लाया जा रहा है, तो उनकी खरीद क्यों की गई?
अयोध्या जिला चिकित्सालय लूट-खसोट व भ्रष्टाचार को लेकर आए दिन चर्चा में रहता है। वर्षे 2023 में तत्कालीन प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक रहे डा. बृज कुमार व चिकित्सा अधीक्षक रहे डा. विपिन वर्मा ने जिला अस्पताल के लिए छह करोड़ से अधिक बजट से उपकरण व संसाधनों की खरीद कर ली। खरीद को लेकर उस समय भी तमाम सवाल उठे थै । किन्तु जांच शुरू भी हुई और लीपापोती कर ली गई। उसी बीच प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक रहे डा. बृज कुमार को उनके पद से हटा दिया गया।
डा. बृज कुमार के कार्यकाल में हुई छह करोड़ के सामानों पर अब एकबार फिर से सवाल उठने लगे हैं। खरीदे गए तमाम उपकरण आज भी गोदाम या वार्ड की अलमारियों में कैद हैं। तमाम ऐसे भी उपकरण खरीदे गए जो काफी कम समय में खराब हो गए। सामानों की सप्लाई देने वाली कम्पनी ने उनको रिप्लेस नहीं किया।
ऐसे ही दो उपकरण की जानकारी सामने आई है जिनकी खरीद हुई किन्तु उनका न तो कही उपयोग है रहा हैऔर न उसके संचालन के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। यहाँ तक कि एक मशीन में लगने वाली स्टिप भी आज तक नहीं खरीदी गई।
जिला चिकित्सालय में इजी चेक हीमोग्लोबिन मीटर की खरीद हुई थी। इसका उपयोग रक्त में हीमोग्लोबिन के स्तर को मापने के लिए किया जाता है। यह एक पोर्टेबल और उपयोग में आसान डिवाइस है, जो घर पर या क्लिनिक में हीमोग्लोबिन के स्तर की जांच करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक ऐसा उपकरण है जो रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा को मापता है। हीमोग्लोबिन एक प्रोटीन है, जो लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है, और ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न हिस्सों में ले जाने में मदद करता है। हीमोग्लोबिन के स्तर को मापने से एनीमिया (रक्त की कमी) और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। रक्त दान करने से पहले, हीमोग्लोबिन के स्तर की जांच की जाती है, और यह उपकरण रक्त दान के लिए उपयुक्तता निर्धारित करने में मदद करता है। इस मशीन की खरीद हुई लेकिन प्रयोग में नहीं लाई गई।
इसी प्रकार एक अन्य मशीन है वेन फाइंडर जो नस खोजक चिकित्सा उपकरणों की श्रेणी से संबंधित हैं । इसे अक्सर इन्फ्रारेड नस दर्शक , लेजर नस खोजक या नस प्रकाशक के रूप में संदर्भित किया जाता है। । इसका उपयोग नसों को देखने के लिए किया जाता है। कभी कभी छोटे बच्चों, बुजुर्गों या मोटे लोगों की नस खोजने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। इस मशीन की भी खरीद की गई लेकिन कहीं इसका भी प्रयोग होते नहीं दिखाई पड़ रहा है। बड़ा सवाल यह है कि जब इनका कोई उपयोग नहीं किया जा रहा है, तो खरीद की ही क्यों गई थी। बिना आवश्यकता के की गई सामानों की खरीद के पीछे कहीं बड़ी कमीशन खोरी तो नहीं रही है ?
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यदि सामान खरीदा गया तो उसका उपयोग होना चाहिए
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. एके सिन्हा ने कहा कि यदि अस्पताल के लिए कोई सामान खरीदा गया तो उसका उपयोग भी होना चाहिए, अन्यथा उसके खरीदे जाने का कोई औचित्य ही नहीं बनता। कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी जरूरी है। डा सिन्हा ने कहा कि हो सकता है और भी कुछ सामान ऐसे हों जिनकोे उपयोग में नहीं लाया जा रहा है। चह खरीद मेरे कार्यकाल की नहीं है और न ही मेरे पास खरीदे गए सामानों की कोई सूची है।
Author: Rainbow News Hindustan
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