चित्तौडगढ से नरेन्द्र सेठिया की रिपोर्ट
* पांडोली की पाल पर विराजीं लकवा हरने वाली झांतला माता, विज्ञान भी है हैरान
!*मेवाड़ के प्रसिद्ध शक्तिपीठ में वटवृक्ष की परिक्रमा से मिलता है लकवा से छुटकारा – माताजी की पांडोली में उमड़ती है आस्था
*चित्तौड़गढ़।* जिला मुख्यालय से मात्र 9-10 किलोमीटर दूर, रोड पर माताजी की पांडोली गांव में ऐतिहासिक तालाब की पाल पर स्थित श्री झांतला माता मंदिर मेवाड़ के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। इसे वटयक्षिणी देवी मंदिर भी कहा जाता है।
*मंदिर की महिमा और मान्यताएं –
मान्यता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व यहां विशाल वटवृक्ष के नीचे देवी की प्रतिमा प्रकट हुई थी। कालांतर में विक्रम संवत 1215 के आसपास यहां विशाल मंदिर का निर्माण हुआ। गर्भ गृह में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों व पांच देवियों की चमत्कारी प्रतिमाएं स्थापित हैं।
इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है, कुछ मान्यताओं में इसे महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि पन्नाधाय का जन्म भी इस मंदिर की सेवा करने वाले गुर्जर परिवार में हुआ था। मंदिर की सेवा लगभग 125 वर्षों से गुर्जर समाज का एक ही परिवार कर रहा है।
*विशेष चमत्कार – लकवा रोग से मुक्ति -*
यह मंदिर देशभर में लकवा (Paralysis) ग्रस्त रोगियों के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र और मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा से गंभीर लकवा पीड़ित को भी लाभ मिलता है। जो रोगी सोते-बैठे आते हैं, वे हंसते हुए जाते हैं।
यहां आने वाले मरीजों को मंदिर परिसर में ही रात्रि विश्राम करना होता है। नवरात्रि के 9 दिन यहां रुककर पूजा करने से विशेष लाभ माना जाता है। रोग मुक्त होने पर श्रद्धालु आभार स्वरूप परंपरा अनुसार जिंदा मुर्गे का उतारा कर मंदिर परिसर में छोड़ते हैं।
चैत्र और शारदीय दोनों नवरात्रों पर यहां 9 दिन भव्य मेला लगता है, 5 प्रकार की विशेष आरती होती है। अमावस्या पर भी भारी भीड़ रहती है। गुजरात, मुंबई, मध्यप्रदेश सहित राजस्थान के चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, राजसमंद से लाखों श्रद्धालु आते हैं।
*कैसे पहुंचें -*
चित्तौड़गढ़ कलेक्ट्रेट चौराहे से 9-10 KM, शहर से टेम्पो, प्राइवेट बसें और अन्य वाहन आसानी से उपलब्ध हैं।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





