चितौडगढ नरेन्द्र सेठिया
चित्तौड़गढ़ में प्रस्तावित खाद कारखाने के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) जिले के चंदेरिया क्षेत्र में प्रस्तावित खाद कारखाने के विरोध में सोमवार को आसपास के लगभग 25 गांवों के ग्रामीणों ने जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (वेदांता समूह) पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध रूप से कारखाना निर्माण का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों के अनुसार, चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर परिसर, पुठोली में बिना वैध पूर्व पर्यावरणीय अनुमति तथा राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की स्थापना स्वीकृति के बिना ही खाद कारखाने का निर्माण कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का स्पष्ट उल्लंघन है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि प्रस्तावित कारखाने को लेकर स्थानीय जनभावनाओं और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। बिना विधिसम्मत प्रक्रिया और पारदर्शिता के किए जा रहे इस निर्माण कार्य से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान में संचालित लेड-जिंक स्मेल्टर से निकलने वाले विषैले रसायनों के कारण क्षेत्र में वायु, जल और भूमि प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। इससे कृषि भूमि बंजर होती जा रही है तथा भू-जल अत्यधिक प्रदूषित होकर अति संवेदनशील श्रेणी में पहुंच गया है। रात्रि के समय उत्सर्जित गैसों के कारण श्वास तथा त्वचा संबंधी रोगों में भी तेजी से वृद्धि हो रही है।
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी नई इकाई की स्थापना अथवा विस्तार से पूर्व पर्यावरणीय सावधानी सिद्धांत का पालन करना अनिवार्य है, जिसकी यहां खुलेआम अवहेलना की जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से निम्न मांगें कीं—
निर्माण स्थल का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए।
बिना अनुमति चल रहे निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाकर ध्वस्त किया जाए।
पर्यावरण को हुई क्षति के लिए कंपनी पर पर्यावरणीय प्रतिकर लगाया जाए।
प्रस्तावित खाद कारखाने को जनहित में तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रदूषण के कारण पशुओं की हो रही मृत्यु की वास्तविक स्थिति जानने हेतु उनके रक्त नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) की निष्पक्ष जांच कर उसकी प्रतिवेदन प्रति शिकायतकर्ता दल को उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीणों ने बताया कि वे पूर्व में भी कई बार विरोध प्रदर्शन कर संबंधित विभागों एवं केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंप चुके हैं, किंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सोमवार को आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने जिला कलक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री, मुख्यमंत्री राजस्थान, राज्य पर्यावरण मंत्री तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण, भोपाल के नाम ज्ञापन प्रेषित किया।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर प्रशासन द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन एवं धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की होगी।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





