हनुमत चरित्र के साथ भागवत कथा का शुभारंभ।

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हनुमत चरित्र के साथ भागवत कथा का शुभारंभ।

अयोध्या रामसेवकपुरम में वृंदावन से पधारे परम पूज्य संतों के दुलारे श्री इंद्रेश जी महाराज ने हनुमत जयंती के अवसर पर सत्संग समिति गोरखपुर द्वारा आयोजित श्री भागवत कथा महोत्सव का हनुमत कथा से किया शुभारंभ

महराज राजा दशरथ के पावन पुत्रेष्टि यज्ञ से प्राप्त चरु का एक भाग चील पक्षी ले जाकर माता अंजनी के गोद में डाल दिया जिससे शंकर जी के कृपा स्वरूप हनुमान जी महराज का जन्म हुआ । इसी लिए राम जी भारत की तरह ही हनुमान जी को प्रेम करते है। तुम मम प्रिय भरत सम भाई । जहां जहां भरत जी अनुपस्थित रहे वहां हनुमान जी महराज भरत की तरह ही सेवा भाव में समर्पित रहे। अगर हनुमान जी महराज किसी भी जीव का समर्थन कर दे तो प्रभु श्री राम उसे अवश्य अपना लेते है। जैसे सुग्रीव को मिलाया ।
राघव को पाना है तो हनुमान को मनाना है। वीर वर श्री हनुमान जी कभी अपने को भगवान नहीं बताया संतों ने भी ए नहीं कहा । संतों ने कहा – जय जय हनुमान गोसाई । कृपा करहू गुरुदेव की नाई।
गुरु की भूमिका में हनुमान जी से अच्छा कोई नहीं हो सकता
इसी मध्य हनुमान गढ़ी के श्री महंत राजू दास जी महाराज पधारे । सत्संग समिति गोरखपुर के द्वारा उनका पूजन कर आशीर्वाद ग्रहण किया।
इसके बाद भागवत माहात्म्य की कथा सुनाई । श्री इंद्रेश जी महराज ने सभी भक्तों को सुंदर भजनों के द्वारा आनंदित कर भक्ति का संचार कर दिया। समिति के तरफ से श्री मक्खन गोयल जी एवं शकुंतला गोयल जी आरती के साथ आज की कथा का विश्राम किया ।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

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