अयोध्या। भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में स्थित विश्व विराट विजय राघव मंदिर में प्रभु श्रीराम के विराट स्वरूप के दर्शन का विशेष महत्व है। बताया जाता है कि पूरे देश में यह एकमात्र मंदिर है, जहां भगवान श्रीराम के विराट रूप की प्राण प्रतिष्ठा 2008 में महामंडलेश्वर महंत नरसिंह दास महाराज के संयोजन में हुई थी और प्राण प्रतिष्ठा के समय कई देशों के राजदूत भी अयोध्या पहुंचे थे।विश्व विराट विजय राघव भगवान की स्थापना के 18 वर्ष पूर्ण होने पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किए गए। इस अवसर पर भगवान का पंचामृत से अभिषेक कर नवीन वस्त्र धारण कराए गए तथा विधि-विधान से आरती-पूजन किया गया। उपस्थित संतों एवं श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।महामंडलेश्वर महंत नरसिंह दास महाराज ने बताया कि जगत कल्याण और विश्व शांति के उद्देश्य से मंदिर में भगवान के विराट स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा कि गई थी। उनके शिष्य महामंडलेश्वर महावीर दास महाराज ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर विश्व विराट विजय राघव सरकार का यह अद्वितीय मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।उन्होंने बताया कि जब प्रभु श्रीराम माता कौशल्या के यहां प्रकट हुए थे और माता ने उनकी स्तुति की थी, उसी विराट स्वरूप का दर्शन मंदिर में होता है। मान्यता है कि इस रूप के दर्शन के उपरांत श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माता कौशल्या की स्तुति के प्रसंग में भगवान ने विराट रूप से बाल स्वरूप धारण कर धरती पर मर्यादा की स्थापना की और मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए।इस अवसर पर मंदिर परिसर में खड़ेश्वरी मंदिर के महंत रामप्रकाश दास, महंत नंदराम, महंत मनमोहन दास, महंत रामकुमार दास, प्रभु दास उर्फ मामा दास, स्वामी छविराम दास, नीरज शास्त्री, पार्षद पुजारी रमेश दास, भरत दास, पुजारी मामा दास, जयमंगल दास, नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता सहित अनेक संत-महंत एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने विश्व विराट विजय राघव सरकार के दर्शन-पूजन कर विश्व कल्याण की कामना की।
Author: Rainbow News Hindustan
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