विद्यालयों में लोकतांत्रिक मूल्यों को सीखने में बाल संसद की महत्वपूर्ण भूमिका -माली
बगड़ी नगर,पाली।
विद्यालयों में लोकतांत्रिक मूल्यों को सीखने में बाल संसद की महत्वपूर्ण भूमिका है।विद्यालयों में बाल संसद के गठन से विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया व मूल्यों का प्रशिक्षण मिलता है साथ ही व्यक्तित्व विकास होता है। बाल संसद बच्चों की मुखर आवाज बनकर उसके समाधान की राह निकालती है। अतः हमारे विद्यालयों में बाल संसद का गठन कर प्रभावी संचालन करना चाहिए। उक्त उद्गार अतिरिक्त मुख्य ब्लाक शिक्षा अधिकारी देसूरी विजयसिह माली ने स्थानीय जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बगड़ी नगर में कार्यानुभव प्रभाग के तत्वावधान में आयोजित बाल संसद क्रियान्वयन एवं प्रबंधन विषयक एक दिवसीय आमुखीकरण कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए।
माली ने कहा कि बाल संसद बच्चों को सीखने के अवसर प्रदान करती है ,यह बच्चों में नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करती है।इस अवसर पर बोलते हुए प्रभागाध्यक्ष गणपत लाल प्रजापत ने कहा कि हमें बाल संसद के सदस्यों को प्रशिक्षण देना है,बाल संसद की गतिविधियों व कार्यों का दस्तावेजीकरण करना है, उन्हें विद्यालय की पत्रिका व वार्षिकोत्सव में स्थान देना है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डगरा राम चौधरी ने की।
सरस्वती पूजन व सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुए इस आमुखीकरण प्रशिक्षण में संदर्भ व्यक्ति के रूप में अतिरिक्त मुख्य ब्लाक शिक्षा अधिकारी देसूरी विजयसिह माली ने पाली जिले के विभिन्न ब्लाकों से आए प्रधानाचार्यों को बाल संसद की पृष्ठभूमि,बाल संसद के उद्देश्य,बाल संसद के गठन की प्रक्रिया,बाल संसद की कार्यवाही की विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण में महेंद्र कुमार मेवाड़ा, कविता गहलोत, जगदीश,अशोक कुमार मीना, चुन्नीलाल चौधरी समेत समस्त संभागियो ने इससे संबंधित चार्ट तैयार कर अपनी बात रखी। नैनाराम घांची,मदन मोहन सोनल,पारसमल प्रजापति, आनंद किशोर, सोहनलाल गर्ग,तुलसाराम चौधरीव रमेश चंद्र सापेला समेत कई संभागियो ने बाल संसद से संबंधित अपने अनुभव साझा किए।गणपत लाल प्रजापत ने जिज्ञासा समाधान किया। डगरा राम चौधरी ने आभार व्यक्त किया।
उल्लेखनीय है कि बाल संसद विद्यालयों में किया जाने वाला नवाचार है जो विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक है।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





