सारे दुःखों का समाधान मात्र मोक्ष में है।
फालना,पाली।
जैनाचार्य बाली रत्न, हिन्दी साहित्यकार, पूज्य आचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी महाराज (राजू महाराज) ने श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक तपागच्छ संघ, फालना के आराधना भवन में धर्मसभा को सम्बोधित देते हुए कहा कि—
संसार के समस्त भौतिक सुख अनेक कलंकों से कलंकित हैं। जैसे रेगिस्तान की भूमि में जब गरम-गरम हवा चलती है तब दूर से ऐसा लगता है जैसे वहाँ पर पानी से भरा सरोवर है, परंतु जब पास जाते हैं तब उसे वहाँ पानी तो नहीं मिलता, बल्कि प्यास के कारण व्यक्ति की मौत हो जाती है।
वैसे ही संसार में जिन इन्द्रिय के विषय भोग में हम सुख की कल्पना करते हैं, उनसे प्राप्त होने वाला सुख वास्तव में सुख नहीं, सुखाभास है।
भौतिक सुख क्षणिक है, पापकारी है, पुण्य के अधीन है, दुःख प्रतिकार स्वरूप है और नाशवंत है। इन सभी कलंकों के कारण यह सारा संसार दुःखरूप और दुःखदायी है। जैसे समुद्र का पानी सर्वत्र खारा है, नीम के पत्ते सर्वत्र कड़वे हैं, वैसे संसार सर्वत्र दुःखदायी है। रोग, शोक, वियोग, भय, जन्म, मरण ये सारी समस्याएँ संसारी जीवों को जीवन भर मजबूरी से सहनी पड़ती हैं।
इन सारे दुःखों का समाधान मात्र मोक्ष में है। मोक्ष में न रोग है, न शोक है, न संयोग है, न वियोग है, न जन्म है, न जरा है, न मृत्यु है। संसार के सभी जीवों पर मृत्यु का एकछत्र शासन है, परंतु जो सभी कर्मों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त हुए हैं, उन पर मृत्यु भी शासन नहीं कर सकती है।
मानव जीवन को यदि सफल और सार्थक बनाना हो तो भौतिक सुखों का त्याग कर आत्मिक सुख की प्राप्ति हेतु संयम जीवन का स्वीकार करना श्रेयस्कर है।
दि. 21 जनवरी को प्रातः 9:45 बजे “पुणिया श्रावक की आदर्श सामायिक” का आयोजन होगा।
दि. 22 जनवरी को प्रातः 8:30 बजे गाजते-बाजते श्री केशरिया जी नगर में भव्य प्रवेश होगा, फिर पूज्यश्री का प्रवचन होगा। फिर मंदिरजी में 18 अभिषेक होगा ।
Author: Rainbow News Hindustan
Mo.9414526432





