भारतीय संस्कृति के मूल में मानवाधिकारों की अवधारणा-माली

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भारतीय संस्कृति के मूल में मानवाधिकारों की अवधारणा -माली
सादड़ी,पाली।

भारतीय संस्कृति के मूल में मानवाधिकारों की अवधारणा है। हमारी संस्कृति सर्वे भवन्तु सुखिन…की भावना से ओत-प्रोत है जो मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन की आधारशिला है।हम मानवाधिकारों का संरक्षण संवर्धन करें। उक्त उद्गार अतिरिक्त मुख्य ब्लाक शिक्षा अधिकारी देसूरी विजयसिह माली ने निकटवर्ती राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मादा में मानवाधिकार दिवस पर प्रार्थना सभा में व्यक्त किए।
माली ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर निरंतर मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन का समर्थन करता आया है।हम सभी मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए अपने व्यक्तित्व का विकास करें व समाजोपयोगी कार्य करें।
उन्होंने सभी स्टाफ सदस्यों व विद्यार्थियों को मानवाधिकारों का संरक्षण करने का संकल्प दिलाया। इससे पहले अतिरिक्त मुख्य ब्लाक शिक्षा अधिकारी देसूरी विजयसिह माली ने प्रार्थना सभा का अवलोकन किया तथा प्रभावी प्रार्थना सभा को सराहा।
इस अवसर पर रमेशकुमार,सरोज भाटी,राजेश कुमार मीना,हरीश कुमार चौधरी, मीनाक्षी राणावत, कपिल मीना,छोटूदान सांदू, कल्पेश कुमार, भंवरलाल भाटी व मंगेज सिंह समेत समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। तत्पश्चात माली ने राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय मादा, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मुठाना व राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गुड़ा मांगलियान का शाला संबलन के तहत प्रखर राजस्थान 2.0की कक्षाओं, आईसीटी लैब, एमडीएम, पुस्तकालय व कार्यपुस्तिकाओं का अवलोकन किया तथा अभिलेखों की जांच कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।इस अवसर पर संस्था प्रधान सुखा राम, निर्मल कुमार व आनंदकुमार शर्मा समेत समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
उल्लेखनीय है कि 10दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के रुप में मनाया जाता है।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

Mo.9414526432

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