मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन आदर्शों पर चलने से ही मानव जीवन का उद्धार।
अयोध्या।
रामकोट चक्रवर्ती महाराज श्री दशरथ महल में श्री राम विवाहोत्सव के पुनीत अवसर पर दशरथ महल पीठाधीश्वर विंदु गद्दाचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता एवं पावन सानिध्य तथा मंगल भवन पीठाधीश्वर जगदगुरु अर्जुन द्वाराचार्य कृपालु राम भूषण दास जी महाराज के संयोजकत्व में यशस्वी कथा व्यास जगदगुरु रामा नुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज के श्रीमुख से हो रही श्री राम कथा का रसपान कर संत, महंत,भक्त कृतकृत्य हो रहे हैं। पकथा व्यास जी भक्तों को श्री राम कथा का रसपान कराते हुए कहते हैं
मुख्य रूप से सती चरित्र का वर्णन, शिव विवाह, और मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन आदर्शों पर चर्चा की गई है। इन घटनाओं में माता सती का दक्ष प्रजापति के यज्ञ में जाना और आत्मदाह करना, भगवान शिव के विवाह की कथा सुनाना और श्रीराम के जीवन के सिद्धांतों को समझाना शामिल है।
कई कथाओं में दूसरे दिन सती चरित्र का वर्णन किया गया है, जिसमें दक्ष प्रजापति द्वारा भगवान शिव को आमंत्रण न देना, और सती का पिता के यज्ञ में जाकर अपमान सहन न कर पाने के कारण आत्मदाह करना बताया गया है।
शिव विवाह: कुछ स्थानों पर, दूसरे दिन शिव विवाह की कथा सुनाई गई, जिसमें पार्वती के जन्म से लेकर शिव के बारात ले जाने तक के प्रसंगों का वर्णन किया गया।
मर्यादा और जीवन आदर्श: अन्य कथाओं में, कथावाचकों ने भगवान श्रीराम के जीवन और मर्यादा पर जोर दिया, और बताया कि कैसे उनके आदर्शों का पालन करके जीवन को सुख-समृद्ध बनाया जा सकता है।
राम नाम की महिमा कुछ कथाओं में राम नाम की महिमा का वर्णन करते हुए बताया गया है कि राम नाम लेने से पापी भी सद्गति पा सकता है।
Author: Rainbow News Hindustan
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