दशरथ महल में श्री राम कथा की हो रही अमृत वर्षा :रत्नेश प्रपन्नाचार्य

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दशरथ महल में श्री राम कथा की हो रही अमृत वर्षा :रत्नेश प्रपन्नाचार्य

संजय यादव अयोध्या
अयोध्या। रामकोट चक्रवर्ती महाराज श्री दशरथ महल में श्री राम विवाहोत्सव के पुनीत अवसर पर दशरथ महल पीठाधीश्वर विंदु गद्दाचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता एवं पावन सानिध्य तथा मंगल भवन पीठाधीश्वर जगदगुरु अर्जुन द्वाराचार्य कृपालु राम भूषण दास जी महाराज के संयोजकत्व में यशस्वी कथा व्यास जगदगुरु रामा नुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज के श्रीमुख से हो रही श्री राम कथा का रसपान कर संत, महंत,भक्त कृतकृत्य हो रहे हैं। पकथा व्यास जी भक्तों को श्री राम कथा का रसपान कराते हुए कहते हैं कि सिया जी तो क्लेश हारनी हैं। जीव के सभी क्लेश को हर लेती हैं। श्री राम जी तो शरण में जाने पर कृपा करते है किन्तु किशोरी जो बिना शरण में आए हुए भक्तों का भी क्लेश हरण करती है। किशोरी जी को आचार्या माना जाता है। रामायण की कथा का फल है कि राम जी के चरणों की भक्ति प्राप्त हो जाय। जब तक किशोरी जी कृपा नहीं होती तब तक राम जी की कृपा,भक्ति प्राप्त नहीं हो सकती। यशस्वी कथा व्यास स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज कहते हैं गुरु साक्षात पर ब्रह्म हैं। भगवान शिव का संहार भी स्थाई नहीं होता,विष्णु जी पालक है। ब्रह्मा जी जो हृदय में ज्ञान की सृष्टि होती है। एक बार हृदय से ज्ञान की सृष्टि मिट जाय तो पुनः उसकी सृष्टि नहीं हो सकती। स्वामी जी कहते हैं जहां तर्क होता है वहां मति निर्मल नहीं हो सकती। यदि हम सब किशोरी जी की कृपा से युक्त हो जाएं तो हमारी मति निर्मल हो जाएगी। श्री राम कथा को विस्तार देते हुए व्यास जी कहते हैं एक बार त्रेता युग में भगवान शंकर माता सती के साथ महर्षि अगस्त्य के पास आए। ऋषि ने उनकी पूजा अर्चना की। अगस्त्य जी ने जो भी कथा श्रवण कराई उस पर ध्यान नहीं दिया। भगवान शिव विश्वास के स्वरूप है,बिना विश्वास के परमात्मा को समझा जा सकता है। भगवान शिव कहते हैं देवी तुम मेरा विश्वास तो तोड़ रही हो,विवेक,और विचार दो सूत्र शेष हैं। शिव जी ने कहा जब तक तुम परीक्षा लेकर नहीं आती हो मै वट वृक्ष के नीचे बैठता हूं। माता सती ने विश्वास तो छोड़ दिया विवेक का भी त्याग कर दिया। सती ने विचार किया कि यदि मैं सीता जी का भेष बना लूं ,भेष तो बना लिया किन्तु आचरण करने नहीं आया,राम जी के आगे चलने लगीं। राम जी ने प्रणाम किया,पिता सहित अपना नाम लिया। कहा बृषकेतु कहा है,वन में अकेली कहा घूम रही हो,जो धर्म की ध्वजा को धारण करते हैं उन्हें छोड़ कर, धर्म को छोड़ कर क्यों आई। सती समझ गई कि मैं पहचान ली गई और वापस शिव जी के पास आई। भगवान शिव कैलाश आए। सती जी दक्ष के यहां गई वहां पति का भाग नहीं देखा तो योगाग्नि में जल गई। इस पुनीत अवसर ,तुलसी दास छावनी के पीठाधीश्वर महंत जनार्दन दास,हनुमान गढ़ी महंत बलराम दास, महंत, वरुण दास ,महंत श्री राम शंकर दास, रामायनी,पंडित विष्णु प्रसाद नायक शास्त्री ,,महंत श् राम गोपाल दास, राम भरत मिलाप मंदिर, मणि मंदिर राम नंदन दास, सहित बड़ी संख्या में संत महंत, भक्त, श्रद्धालु, अतिथि एवं कथा श्रोता भक्त उपस्थित हो श्री राम कथा रस का पान कर कृतकृत्य होते रहे।

Rainbow News Hindustan
Author: Rainbow News Hindustan

Mo.9414526432

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